घने कोहरे से पटरी पर असर, रेलवे सेवाएं फिर हुईं बाधित
Dense fog affects railway tracks, causing further disruption to train services.
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन माना जाता है, लेकिन सर्दियों में पड़ने वाला घना कोहरा इसके संचालन में बड़ी चुनौती बन जाता है। बार-बार तैयारियों के दावों के बावजूद कोहरे के कारण एक बार फिर रेलवे सेवाएं प्रभावित हुई हैं। उत्तर भारत में घने कोहरे के चलते ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
100 से अधिक ट्रेनें 6 घंटे तक लेट, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
सोमवार को 100 से ज्यादा ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे देरी से चलीं, जिनमें कुछ ट्रेनें छह घंटे तक लेट रहीं। इससे यात्रियों की यात्रा योजनाएं बिगड़ गईं और स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ा। खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री सबसे अधिक प्रभावित हुए।
उत्तर रेलवे का बयान—सुरक्षा के साथ किया जा रहा संचालन
ट्रेनों के विलंब को लेकर उत्तर रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उत्तरी क्षेत्र में व्याप्त घने कोहरे के कारण कुछ सेवाएं समय से पीछे चल रही हैं। अधिकारी के अनुसार, कोहरे की स्थिति में यात्रियों और ट्रेनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संचालन किया जा रहा है। रेलवे का दावा है कि देरी को कम करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है।
कोहरे से निपटने के लिए हर साल बनती है विशेष योजना
रेलवे हर वर्ष सर्दियों से पहले ‘कोहरे से निपटने की योजना’ तैयार करता है। इसके तहत पिछले वर्षों में आई दिक्कतों की समीक्षा की जाती है और संभावित परिस्थितियों का आकलन किया जाता है। यात्रियों को अंतिम समय की असुविधा से बचाने के लिए कुछ सिंगल-रेक ट्रेनों को दो से तीन महीने पहले ही रद्द कर दिया जाता है।
रीशेड्यूलिंग और डुप्लीकेट ट्रेनों का लिया जाता है सहारा
कोहरे के दौरान रेलवे कई ट्रेनों को रीशेड्यूल करता है और कुछ मामलों में सिंगल-रेक ट्रेनों को वापस ले लेता है। यात्रियों को समायोजित करने के लिए उसी मार्ग पर वैकल्पिक सेवाएं चलाई जाती हैं। अत्यधिक लोकप्रिय ट्रेनों के लिए ‘क्लोन’ या ‘डुप्लीकेट’ ट्रेनें भी चलाई जाती हैं ताकि यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
अत्यधिक देरी पर ट्रेन के फेरे किए जाते हैं रद्द
जब कोई ट्रेन 15 से 17 घंटे तक लेट हो जाती है, तो संचालन को सामान्य करने के लिए रेलवे उसका एक फेरा रद्द कर देता है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त रेक तैनात कर डुप्लीकेट सेवाएं चलाई जाती हैं, जिससे समय-सारणी को संतुलित रखा जा सके।
रेलवे अधिकारियों का दावा—फॉग सेफ्टी डिवाइस से बढ़ी सुरक्षा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कोहरे के मौसम को ध्यान में रखते हुए फॉग सेफ्टी डिवाइस पहले ही लगाए जा चुके हैं। सर्दियों में ट्रैक गश्त बढ़ा दी जाती है और यात्रियों की सुविधाओं की नियमित जांच की जाती है। उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ शशि किरण ने बताया कि पिछले आंकड़ों के आधार पर ट्रेनों को रद्द या तर्कसंगत करने का निर्णय लिया जाता है।
यात्रियों की राय—हर साल झेलनी पड़ती है वही परेशानी
यात्रियों का कहना है कि कोहरे के कारण हर साल उन्हें ट्रेन देरी की समस्या से जूझना पड़ता है। दिल्ली निवासी गफ्फार अली ने बेहतर और स्थायी समाधान की मांग की, वहीं यूपी के लोनी निवासी परवीन शर्मा का कहना है कि कोहरे के दिनों में ट्रेन यात्रा हवाई यात्रा से ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बन जाती है।
जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस कैसे करता है मदद
कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों को जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। यह उपकरण सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग, गति प्रतिबंध और न्यूट्रल सेक्शन की जानकारी रियल टाइम में देता है। लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मार्च तक देशभर में करीब 25,939 फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाए जा चुके हैं, जिससे कोहरे में भी सुरक्षित संचालन संभव हो सका है।



