राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग तेज, गांधी पार्क में धरना और हरीश रावत का मौन उपवास
Demand for revenue village status intensifies, protest in Gandhi Park and silent fast by Harish Rawat
देहरादून: देहरादून में बिंदू खत्ता, बापूग्राम, पुछड़ी, बागजाला, गुलरानी टोंगिया समेत विभिन्न इंदिरा ग्राम, गांधी ग्राम और हरि ग्राम बस्तियों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एक घंटे का मौन उपवास रखकर भूमिहीनों और आपदा प्रभावित परिवारों को अधिकार दिलाने की मांग उठाई।
भूमिहीनों के हक की उठी आवाज
धरने को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि राज्य के सामने ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो गई हैं, जिनसे लाखों लोगों के सामने अपनी छत और आजीविका बचाने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि इन बस्तियों में रहने वाले लोग दशकों से वहां बसे हैं, लेकिन आज भी उन्हें मालिकाना हक नहीं मिला है। उनका मानना है कि इस समस्या का समाधान राज्य सरकार के पास है और इसे संवेदनशीलता के साथ सुलझाया जाना चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में कांग्रेस सरकारों ने इस दिशा में नीतिगत फैसले लिए थे, लेकिन वर्तमान में उन निर्णयों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग
हरीश रावत ने कहा कि टोंगिया गांव, खत्ते और गोठ जैसी व्यवस्थाएं उस समय विकसित हुईं, जब जंगलों की प्रशासनिक संरचना अस्तित्व में आई। लोगों ने वहां स्थायी बसासतें बसाईं और पीढ़ियों से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि संसद द्वारा पारित वनाधिकार कानून में ऐसे गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने का प्रावधान है। इसलिए सरकार को पहल कर इन बस्तियों को वैध मान्यता देनी चाहिए।
मालिकाना हक और पुनर्वास का मुद्दा
उधम सिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जैसे जिलों में कई ऐसी बस्तियां हैं, जहां लोग वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन उन्हें भूमि का स्वामित्व नहीं मिला। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकार इन बस्तियों को अतिक्रमण बताकर हटाने की तैयारी में है, जबकि इनके लिए कोई ठोस पुनर्वास योजना सामने नहीं रखी गई है।
उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं या राजनीतिक कारणों से बार-बार उजाड़े जाने का डर इन परिवारों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।
मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें 26 दिसंबर 2016 को तत्कालीन मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के 10 बिंदुओं को लागू करने की मांग की गई है। ज्ञापन में लाभार्थियों को भूमि धरी अधिकार देने और लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की अपील की गई है।
इसके अलावा टिहरी डैम विस्थापितों और वन क्षेत्रों में विस्थापित वन गुज्जरों को आवंटित भूमि पर मालिकाना हक देने की मांग भी उठाई गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इन बस्तियों को राजस्व ग्राम का दर्जा और वैधानिक अधिकार नहीं मिलते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।



