उत्तराखंड में कुदरत का ‘सफेद’ कहर, भारी बर्फबारी और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, 2 फरवरी तक स्कूल बंद
Nature's 'white' fury in Uttarakhand, Heavy snowfall and rain disrupt normal life, schools closed until February 2nd.
देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में मौसम के बदले मिजाज ने सामान्य जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से पहाड़ों में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश का ‘डबल अटैक’ देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड और खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर प्रदेश के आठ जिलों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 2 फरवरी 2026 तक बंद रखने का आदेश दिया है।
पहाड़ों में हिमपात और मैदानों में ओलावृष्टि
पिछले 48 घंटों से प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रुक-रुक कर बर्फबारी जारी है। विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पूरी तरह सफेद चादर से ढक चुके हैं। चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले इलाकों में 2 फीट तक ताजी बर्फ जमा हो गई है। वहीं, राजधानी देहरादून सहित हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के मैदानी इलाकों में मध्यम से भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।
इन 8 जिलों में स्कूलों की छुट्टी
छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारियों ने स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। जिन जिलों में 2 फरवरी तक स्कूल बंद रहेंगे, उनमें शामिल हैं:
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गढ़वाल मंडल: देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी।
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कुमाऊं मंडल: अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि मौसम में सुधार नहीं होता है, तो इस अवकाश को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
प्रमुख हाईवे बंद, बिजली और पानी की आपूर्ति ठप
भारी बर्फबारी ने यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तरकाशी में गंगोत्री और यमुनोत्री नेशनल हाईवे कई स्थानों पर बर्फ जमने और फिसलन के कारण बंद हैं। बीआरओ (BRO) और लोक निर्माण विभाग की टीमें सड़क खोलने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार गिरती बर्फ बाधा बन रही है। पहाड़ी क्षेत्रों के दर्जनों गांवों में बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त होने से अंधेरा छाया हुआ है, और पाइप लाइनों में पानी जमने से पेयजल का संकट भी खड़ा हो गया है।


