चारधाम यात्रा 2026, PWD सचिव के निरीक्षण में खुली पोल, सड़कों पर मिलीं बड़ी खामियां, ग्राउंड जीरो पर सुधार कार्य तेज
Chardham Yatra 2026: PWD Secretary's inspection uncovers major road defects, ground zero repairs accelerated
उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू होने में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है। आगामी 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही इस पावन यात्रा का आगाज हो जाएगा। Chardham Yatra Route PWD Maintenance 2026 के तहत राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) यात्रा मार्ग को सुगम बनाने का दावा कर रहे थे, लेकिन हाल ही में हुए उच्चाधिकारियों के निरीक्षण ने जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां की है। सचिव और अपर सचिव के स्थलीय निरीक्षण के दौरान यात्रा मार्गों पर कई गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए अब युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया गया है।
सचिव पंकज कुमार पांडेय ने गंगोत्री मार्ग पर जांची स्थिति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने स्वयं गंगोत्री यात्रा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया। Chardham Yatra Route PWD Maintenance 2026 की तैयारियों का जायजा लेते हुए उन्होंने पाया कि पिछले साल के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें अभी भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हैं। कई स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई कम है और पैच वर्क का काम अधूरा पड़ा है। सचिव ने मौके पर ही संबंधित अधिशासी अभियंताओं को फटकार लगाते हुए अगले 30 दिनों के भीतर सभी गड्ढे भरने और डामरीकरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
बदरीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर भी मिलीं चुनौतियां
गंगोत्री के साथ-साथ केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के मार्गों का निरीक्षण विभाग के अपर सचिव द्वारा किया गया। निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, पिछले मानसून के दौरान जिन संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ दरके थे, वहां अभी भी मलबे का खतरा बना हुआ है। Chardham Yatra Route PWD Maintenance 2026 के प्रोटोकॉल के तहत इन डेंजर जोन को चिन्हित तो किया गया है, लेकिन वहां सुरक्षा दीवार (Retaining Walls) का काम धीमी गति से चल रहा है। अपर सचिव ने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए यात्रा शुरू होने से पहले ‘क्रैश बैरियर’ और साइनेज बोर्ड लगाने का काम अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के लिए ‘प्लान-बी’ तैयार
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विभाग ने इस साल ‘जीरो ब्लॉकेज’ नीति अपनाई है। Chardham Yatra Route PWD Maintenance 2026 के अंतर्गत संवेदनशील क्षेत्रों में मशीनों की तैनाती को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है:
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मशीनों की तैनाती: चिन्हित भूस्खलन क्षेत्रों में मशीनों की क्षमता (Capacity) बढ़ा दी गई है ताकि मलबा आने पर तत्काल मार्ग खोला जा सके।
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वैकल्पिक मार्ग (Alternate Routes): यदि कोई मुख्य मार्ग लंबे समय के लिए बाधित होता है, तो श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक मार्गों की सूची तैयार कर ली गई है। इन रास्तों पर भी पैच वर्क शुरू कर दिया गया है।
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24/7 मॉनिटरिंग: यात्रा मार्गों पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं जो पल-पल की स्थिति पर नजर रखेंगे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई दौर की बैठकों में यह स्पष्ट किया है कि देवभूमि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। Chardham Yatra Route PWD Maintenance 2026 में सड़कों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि लाखों यात्री बस और निजी वाहनों से इन दुर्गम रास्तों को पार करते हैं। PWD का लक्ष्य है कि 15 अप्रैल तक सभी चारधाम मार्गों को ‘गड्ढा मुक्त’ और पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया जाए।
