उत्तराखंड

Badrinath Dham: बदरीनाथ धाम के लिए गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा रवाना, शंकराचार्य ने लिया आशीर्वाद!

Badrinath Dham: Gadu Ghada Oil Kalash Yatra departs for Badrinath Dham, Shankaracharya takes blessings!

भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने की धार्मिक प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है। इसी कड़ी में आज, 8 अप्रैल को ऋषिकेश से Gadu Ghada Tel Kalash Yatra अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। इस पावन यात्रा में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती भी सम्मिलित हुए, जिससे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला।

शंकराचार्य जी ने इस अवसर पर तेल कलश के दर्शन कर आशीर्वाद दिया और कहा कि जो पुण्य भगवान बदरी नारायण के साक्षात दर्शन से मिलता है, वही दिव्य फल इस पवित्र तेल कलश के दर्शन मात्र से प्राप्त होता है।

राजमहल से बदरीनाथ तक का आध्यात्मिक सफर

गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा का संबंध टिहरी राजघराने और डिमरी पंचायत से है। परंपरा के अनुसार:

  • 7 अप्रैल को टिहरी राज दरबार (नरेंद्र नगर) में महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और सुहागिन महिलाओं ने तिलों को पिरोकर तेल निकाला।

  • इस पवित्र तेल को कलश में भरकर श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत को सौंपा गया।

  • यही तेल कपाट खुलने के दिन भगवान बदरी विशाल के अभिषेक के लिए उपयोग किया जाता है।

यात्रा का रूट और विश्राम पड़ाव

केंद्रीय धार्मिक डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी के नेतृत्व में यह यात्रा विभिन्न पड़ावों से होकर गुजरेगी:

  1. 8 अप्रैल: यात्रा ऋषिकेश से शुरू होकर लक्ष्मण झूला स्थित शत्रुघ्न मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी।

  2. 9 अप्रैल: कलश यात्रा श्रीनगर गढ़वाल के लिए प्रस्थान करेगी।

  3. डिम्मर गांव: इसके बाद तेल कलश को डिमरी तीर्थ पुरोहितों के मूल गांव ‘डिम्मर’ स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में रखा जाएगा, जहाँ प्रतिदिन विशेष पूजा होगी।

  4. 20 अप्रैल: यात्रा पाखी और गरुड़ गंगा होते हुए नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) पहुंचेगी।

  5. 22 अप्रैल: शाम तक तेल कलश बदरीनाथ धाम पहुंच जाएगा।

23 अप्रैल को ब्रह्ममुहूर्त में खुलेंगे कपाट

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए 23 अप्रैल की तिथि बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और सेना के बैंड की धुन के साथ बदरीनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।

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