मेरठ Central Market Case में सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला, अवैध निर्माण तोड़कर मूल स्वरूप बहाल करने के आदेश
Supreme Court's stern verdict in the Meerut Central Market case: Orders issued to demolish illegal construction and restore the original layout.
Central Market Case में सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में हुए अवैध निर्माण को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत सेटबैक क्षेत्र में निर्माण किया गया है, उन्हें ध्वस्त कर मूल स्वरूप में लाया जाएगा। कोर्ट ने शास्त्री नगर योजना-7 में एक अप्रैल को सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध हिस्सों को हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निम्न आय वर्ग (LIG) और दुर्बल आय वर्ग (EWS) के मकानों में भी सेटबैक पर किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शहरी नियोजन और भवन नियमों के पालन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Central Market Case में क्या है पूरा मामला?
मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट लंबे समय से अवैध निर्माण और भवन नियमों के उल्लंघन को लेकर विवादों में रहा है। आरोप था कि कई संपत्ति मालिकों ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत सेटबैक क्षेत्र में स्थायी निर्माण कर लिया, जिससे न केवल भवन उपविधियों का उल्लंघन हुआ बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
इसी मामले में एक अप्रैल को 44 संपत्तियों को सील किया गया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लिया।
Central Market Case पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
मंगलवार को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने संपत्ति आवंटियों को राहत देने के लिए नई भवन निर्माण उपविधि लागू करने का आग्रह किया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बाद में नियम बदलकर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी अवैध निर्माणों को हटाकर संपत्तियों को उनके मूल स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप लाया जाए।
44 सील संपत्तियों में अवैध निर्माण हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि शास्त्री नगर योजना-7 में सील की गई 44 संपत्तियों के उन हिस्सों को ध्वस्त किया जाए जो सेटबैक क्षेत्र में बनाए गए हैं।
सेटबैक किसी भी भवन के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खुली जगह होती है। इसका उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं की पहुंच, वेंटिलेशन, रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। यदि इस क्षेत्र में निर्माण कर लिया जाता है तो यह भवन नियमों का उल्लंघन माना जाता है। अदालत ने कहा कि सभी संबंधित भवनों को उनके मूल स्वीकृत नक्शे के अनुरूप बहाल किया जाए।
Central Market Case का असर LIG और EWS मकानों पर भी
इस फैसले का प्रभाव केवल व्यावसायिक संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निम्न आय वर्ग (LIG) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 459 मकानों में भी सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने के आदेश दिए हैं।
अदालत का मानना है कि भवन नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसलिए किसी भी श्रेणी के आवास को नियमों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस आदेश के बाद संबंधित विभाग इन मकानों का सर्वे कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेगा।
पूरे मेरठ में होगी अवैध निर्माण की पहचान
सुप्रीम कोर्ट ने केवल शास्त्री नगर तक ही अपने निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। अदालत ने प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को निर्देश दिया है कि मेरठ शहर के अन्य इलाकों में भी ऐसे भवनों की पहचान की जाए जहां आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है या भवन नियमों का उल्लंघन हुआ है। अदालत ने कहा कि संबंधित विभाग विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करे और अगली सुनवाई में उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। इस निर्देश के बाद संभावना है कि मेरठ के कई अन्य क्षेत्रों में भी अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान तेज हो सकता है।
नई भवन उपविधि लागू करने की मांग क्यों हुई खारिज?
सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि यदि नई भवन निर्माण उपविधियों को लागू कर दिया जाए तो कई संपत्ति मालिकों को राहत मिल सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले किए गए अवैध निर्माण को वैध बनाने के लिए बाद में नियमों में बदलाव करना न्यायसंगत नहीं होगा। कोर्ट का यह रुख इस बात का संकेत है कि भविष्य में भी भवन नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई जारी रह सकती है।
सितंबर में होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को निर्देश दिया है कि सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई से पहले शहर के अन्य हिस्सों में चल रहे अवैध निर्माण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी करेगी।
Central Market Case क्यों बना महत्वपूर्ण उदाहरण?
Central Market Case अब केवल मेरठ तक सीमित मामला नहीं माना जा रहा है। शहरी विकास और भवन नियमों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश के अन्य शहरों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। वर्षों से कई शहरों में सेटबैक पर निर्माण, आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग और स्वीकृत नक्शों से अलग निर्माण जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।



