Babita Pandey Missing Case: 114वें दिन भी नहीं मिला कोई सुराग, दयारा बुग्याल से लापता बबीता की तलाश अब जांच के भरोसे
Babita Pandey Missing Case: No clue found even on the 114th day; search for Babita, who went missing from Dayara Bugyal, now relies on the investigation.
Babita Pandey Missing Case: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दयारा बुग्याल से लापता हुई रामनगर की बबीता पांडे की गुमशुदगी अब भी अनसुलझी पहेली बनी हुई है। 29 मई 2026 को ट्रेक के दौरान गोई बेस कैंप क्षेत्र से लापता हुई बबीता का 19 सितंबर तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है। 29 मई से 19 सितंबर तक 113 दिन पूरे हो चुके हैं, यानी गुमशुदगी की गिनती का 114वां दिन चल रहा है। इस लंबे अंतराल के बावजूद परिवार और पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल वही है—बबीता आखिर कहां गई?
बबीता पांडे 24 वर्षीय MBA छात्रा थीं और रामनगर, नैनीताल की रहने वाली थीं। उन्होंने अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक की योजना बनाई थी। शुरुआती जांच के दौरान सामने आया कि वह 29 मई की रात गोई बेस कैंप के आसपास से लापता हुईं। इसके बाद पुलिस और विभिन्न सुरक्षा एवं राहत एजेंसियों ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया था।
तीन महीने से ज्यादा बीते, फिर भी रहस्य कायम
Babita Pandey Missing Case में शुरुआत से ही कई संभावनाओं पर काम किया गया। पहाड़ी क्षेत्र के कठिन भूभाग, घने जंगलों, जलस्रोतों और दुर्गम रास्तों को देखते हुए पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने अलग-अलग दिशाओं में सर्च ऑपरेशन चलाया। लेकिन लंबे समय तक चलाए गए इस अभियान के बावजूद बबीता का कोई निश्चित पता नहीं चल सका।
शुरुआती दिनों में करीब 120 से 150 कर्मचारियों वाली बहु-एजेंसी टीमें तलाशी में लगी थीं। पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP, सेना, वन विभाग, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और अन्य टीमें अलग-अलग हिस्सों में खोज करती रहीं। ड्रोन, हेलीकॉप्टर, खोजी कुत्तों और पानी के स्रोतों की जांच का भी इस्तेमाल किया गया।
झील, जंगल और दुर्गम इलाकों में भी हुई तलाश
बबीता के लापता होने के बाद गोई बेस कैंप के आसपास मौजूद संभावित स्थानों की बारीकी से पड़ताल की गई। झील और दलदली हिस्सों में डीप-डाइविंग टीमों को लगाया गया। आसपास के जंगलों, पहाड़ी ढलानों, खाइयों और ट्रेक रूट पर भी तलाशी की गई।
हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण कर उन इलाकों को भी देखा गया जहां जमीनी टीमों के लिए पहुंचना मुश्किल था। कई टीमों ने ट्रेक के संभावित रास्तों और आसपास के क्षेत्रों को बार-बार खंगाला, लेकिन कोई निर्णायक सुराग नहीं मिला।
आखिरी CCTV फुटेज से क्या पता चला?
जांच में सामने आया कि बबीता अपने साथियों के साथ उत्तरकाशी पहुंची थीं। 28 मई को रैथल गांव में उनके समूह की मौजूदगी CCTV में दर्ज हुई थी। इसके अगले दिन समूह ने दयारा बुग्याल की ओर ट्रेक शुरू किया और गोई बेस कैंप पहुंचा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रात के समय बबीता के कैंप से बाहर जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद उनका पता नहीं चला। शुरुआती जांच में उनके साथ मौजूद दो युवकों से भी पूछताछ की गई थी। पुलिस ने उनके बयानों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी की जांच की।
फर्जी परमिट का मामला भी जांच में आया
Babita Pandey Missing Case की जांच के दौरान ट्रेकिंग परमिट से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी। अधिकारियों के अनुसार, आधिकारिक Explore Uttarkashi पोर्टल पर इस समूह के नाम से वैध डिजिटल परमिट नहीं मिला था। इसके बाद एक ट्रेकिंग एजेंसी के कथित फर्जी परमिट से जुड़े मामले की भी जांच हुई और उसकी पंजीकरण स्थिति पर कार्रवाई की गई।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे दयारा बुग्याल ट्रेक पर यात्रियों के रजिस्ट्रेशन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठे। हालांकि परमिट से जुड़ी गड़बड़ी अपने आप में बबीता की गुमशुदगी का कारण साबित नहीं करती।
अपहरण की आशंका पर भी हुई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपहरण की आशंका समेत दूसरे संभावित पहलुओं पर भी जांच की गई। बबीता के साथ ट्रेक पर गए दोनों साथियों से पूछताछ की गई और उनके बयानों की पड़ताल की गई। पुलिस ने उस समय कहा था कि जांच में उपलब्ध हर संभावित पहलू को देखा जा रहा है।
हालांकि अब तक ऐसा कोई निर्णायक सार्वजनिक तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बबीता के साथ वास्तव में क्या हुआ।
अब रेस्क्यू नहीं, जांच पर टिकी नजर
लंबे समय तक चले खोज अभियान के बाद अब मामला मुख्य रूप से विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल पर केंद्रित है। परिवार की ओर से लगातार बबीता की जानकारी मिलने की उम्मीद बनी हुई है। पुलिस की कोशिश उपलब्ध तकनीकी जानकारी, पूछताछ और पहले किए गए सर्च ऑपरेशन से मिले इनपुट को जोड़कर मामले की दिशा स्पष्ट करने की है।
मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दयारा बुग्याल का इलाका ऊंचाई, जंगल और कठिन भूगोल के कारण जांच को जटिल बनाता है। शुरुआती दौर में ही अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि बड़े स्तर की तलाशी के बावजूद बबीता का पता नहीं चल पा रहा था।
परिवार का इंतजार अब भी कायम
बबीता के परिवार के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि लंबे इंतजार की कहानी है। महीनों से कोई ठोस जवाब नहीं मिलने के कारण हर नई सूचना उनके लिए उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आती है। मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद जताई है।
Babita Pandey Missing Case ने दयारा बुग्याल जैसे लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट पर सुरक्षा, पंजीकरण और यात्रियों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यह मामला अब सिर्फ एक गुमशुदगी की जांच नहीं, बल्कि पहाड़ी पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का विषय भी बन गया है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही—बबीता कहां हैं?
29 मई की रात से लेकर अब तक मामले में कई रास्ते खंगाले गए, तकनीकी जांच हुई और अलग-अलग एजेंसियां तलाश में उतरीं। फिर भी बबीता का कोई पुख्ता सुराग सामने नहीं आया। दुर्घटना, जंगल में रास्ता भटकना या किसी अन्य संभावना पर अटकलें जरूर लगती रही हैं, लेकिन बिना ठोस साक्ष्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फिलहाल Babita Pandey Missing Case में परिवार की उम्मीद और पुलिस की जांच दोनों जारी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में अगला निर्णायक सुराग कब सामने आता है और क्या महीनों से अनुत्तरित यह सवाल आखिरकार किसी ठोस जवाब तक पहुंचता है।



