उत्तराखंड

उत्तराखंड में जनगणना की तैयारी तेज! स्नो बाउंड क्षेत्रों में 50 हजार लोगों की गिनती पूरी, सहयोग नहीं करने पर होगी FIR

Census preparations intensify in Uttarakhand! Enumeration of 50,000 people completed in snowbound areas; failure to cooperate will lead to an FIR.

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी जनगणना अभियान की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के चार जिलों के स्नो बाउंड क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना पूरी कर ली गई है। इन इलाकों में करीब 50 हजार लोगों की आबादी दर्ज की गई है। वहीं, जनगणना कार्य में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्ती का रुख अपनाया है। अधिकारियों के मुताबिक, ड्यूटी के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं करने वाले विभागों के खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

स्नो बाउंड क्षेत्रों में जनगणना पूरी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों के बर्फ से प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना का काम 30 सितंबर तक पूरा कर लिया गया। इसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक रिविजनल राउंड चलाया गया।

जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, इन क्षेत्रों में करीब 50 हजार लोगों की गणना हुई है। इससे पहले मकान सूचीकरण और मकानों की गणना के दौरान यहां की आबादी लगभग 52 हजार आंकी गई थी।

1 दिसंबर से शुरू होगा जनगणना अभियान

प्रदेश के स्नो बाउंड क्षेत्रों को छोड़कर अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना 1 दिसंबर से शुरू करने की तैयारी है। इससे पहले 16 नवंबर से लोगों को स्वगणना यानी खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा।

जनगणना कार्य निदेशालय लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील कर रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और गणना की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना है।

35 हजार कर्मचारियों को मिलेगी जिम्मेदारी

जनगणना अभियान को पूरा करने के लिए उत्तराखंड में लगभग 35 हजार प्रगणकों, सुपरवाइजरों और रिजर्व कर्मचारियों की जरूरत है। इनके चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक, प्रदेश में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब करीब 600 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद ये ट्रेनर्स प्रदेशभर में तैनात होने वाले प्रगणकों और सुपरवाइजरों को प्रशिक्षित करेंगे।

प्रशिक्षण प्रक्रिया को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि निर्धारित समय पर जनगणना का काम शुरू किया जा सके।

सहयोग नहीं करने वाले विभागों पर सख्ती

जनगणना कार्य निदेशालय के सामने कर्मचारियों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक कर्मचारियों के नाम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कुछ विभागों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि सहयोग नहीं करने वाले कार्यालयों को अंतिम नोटिस जारी किया जा रहा है। इसके बाद भी कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित कार्यालय प्रमुखों या नियंत्रक अधिकारियों के खिलाफ जनगणना अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जा सकती है।

लोगों की भागीदारी पर रहेगा जोर

जनगणना के दौरान नागरिकों को अपनी निर्धारित जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके लिए प्रशासन प्रशिक्षण, कर्मचारियों की तैनाती और जनजागरूकता पर ध्यान दे रहा है।

अब विभाग के सामने समय पर कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रशिक्षण पूरा कराने की चुनौती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि तैयारियां निर्धारित समय पर पूरी होंगी और प्रदेश में जनगणना अभियान व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।

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