उत्तराखंड

Jhilmil Lake Jungle Safari: हरिद्वार में शुरू हुई जंगल सफारी, 30 जून तक कर सकेंगे वन्यजीवों के दीदार

Jungle safari launched in Haridwar; expected to break the record of 16,717 tourists

हरिद्वार: उत्तराखंड में वन्यजीव और प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। हरिद्वार के लालढांग मार्ग पर स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व के द्वार 15 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही यहां नए पर्यटन सीजन की जंगल सफारी शुरू हो गई है। पर्यटक 30 जून तक जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।

हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने पूजा-अर्चना के बाद सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचेंगे और पिछले सीजन का रिकॉर्ड टूट सकता है।

हाथी, गुलदार और भालू देखने का मिलेगा मौका

झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। यहां जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को हाथी, गुलदार, भालू, चीतल, हिरन और सांभर जैसे वन्यजीव देखने का अवसर मिल सकता है।

यह क्षेत्र उन लोगों के लिए खास है, जो जंगल के प्राकृतिक वातावरण को करीब से अनुभव करना चाहते हैं। हालांकि, वन्यजीवों का दिखना उनकी गतिविधियों, मौसम और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए सफारी के दौरान हर जानवर को देखने की गारंटी नहीं होती।

पिछले सीजन में 16,717 पर्यटकों ने की सफारी

झिलमिल झील में जंगल सफारी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पर्यटन सीजन में कुल 16,717 पर्यटक यहां पहुंचे। इससे विभाग को 53,01,200 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

इससे पहले के सीजन में 10,840 पर्यटकों ने सफारी की थी और विभाग को 31,19,525 रुपये की आय हुई थी। दोनों सीजन के आंकड़ों की तुलना करने पर पर्यटकों की संख्या में 5,877 की वृद्धि दर्ज की गई।

पिछले पांच वर्षों में झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में कुल 42,864 पर्यटक जंगल सफारी का आनंद ले चुके हैं। इस अवधि में वन विभाग को लगभग 1.23 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।

इस बार रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद

वन विभाग को उम्मीद है कि नए सीजन में पर्यटकों की संख्या पिछले रिकॉर्ड से आगे निकल सकती है। राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के बीच झिलमिल झील भी अपनी पहचान बना रही है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ संरक्षित क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी है। सफारी के दौरान पर्यटकों को वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए। वन्यजीवों को भोजन देने, उन्हें परेशान करने और जंगल में कचरा फैलाने से बचना चाहिए।

झिलमिल झील में नए सीजन की शुरुआत से हरिद्वार में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि इस बार कितने पर्यटक यहां पहुंचते हैं और क्या सफारी पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ पाती है।

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