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Iran US Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों के दावे से वैश्विक चिंता गहराई

Iran-US Conflict: Tensions escalate in the Middle East; global concern deepens following claims of drone attacks on US military bases in Kuwait.

Iran US Conflict एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए जाने के दावे ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के ठीक अगले दिन सामने आए इन घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि Iran US Conflict अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। इस बीच कुवैत, इराक, ओमान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

Iran US Conflict के बीच कुवैत में ड्रोन हमलों का दावा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तीन ड्रोन के जरिए कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसी दौरान इराक के बसरा क्षेत्र और कुवैत में विस्फोटों की खबरें भी सामने आईं।

हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Iran US Conflict इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरे मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

हमलों से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया था कि ईरान के साथ बातचीत का यह अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में पूरी तरह सतर्क है और वहां से गुजरने वाले समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अनुरोध पर अमेरिका ने फिलहाल नए सैन्य अभियान रोक रखे हैं, ताकि बातचीत का रास्ता खुला रहे।

लेकिन घटनाओं के तेजी से बदलते क्रम ने यह संकेत दिया कि Iran US Conflict के बीच कूटनीतिक प्रयासों को गंभीर चुनौती मिल रही है।

Iran US Conflict पर ईरान ने बातचीत से किया इनकार

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ता की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट कहा कि ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ किसी प्रकार की बातचीत नहीं कर रहा है और इस तरह की रिपोर्टें पूरी तरह निराधार हैं।

इस बयान ने दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों को झटका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष औपचारिक संवाद शुरू नहीं करते, तब तक Iran US Conflict का समाधान आसान नहीं होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग के संचालन को लेकर अस्थायी व्यवस्था पर बातचीत जारी है। ईरान चाहता है कि जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले जहाजों की निगरानी में उसकी प्रमुख भूमिका हो।

हालांकि पहले की तुलना में तेहरान ने अपने रुख में कुछ नरमी दिखाई है और दोनों दिशाओं के समुद्री यातायात पर पूर्ण नियंत्रण की मांग से पीछे हटता नजर आ रहा है।

Iran US Conflict का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

ब्रेंट क्रूड लगभग पांच प्रतिशत तक फिसलकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल इस उम्मीद में है कि कूटनीतिक प्रयास सफल हो सकते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार सामान्य बना रहेगा।

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार यदि Iran US Conflict और अधिक गहराता है तो भविष्य में तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

ओमान और कतर की मध्यस्थता से समाधान की कोशिश

क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए ओमान, कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

कतर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है और संवाद बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई सकारात्मक प्रगति हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है।

यमन, सऊदी अरब और यूक्रेन से जुड़े घटनाक्रम ने बढ़ाई जटिलता

इसी दौरान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का दावा किया है। हालांकि सऊदी अरब की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दूसरी ओर, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहसिन रेजाई ने दावा किया कि कैस्पियन सागर में ईरानी जहाज पर कथित हमले के बाद यूक्रेन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की तैयारी थी, लेकिन यूक्रेन द्वारा गलती स्वीकार करने के बाद कार्रवाई टाल दी गई।

इन समानांतर घटनाओं ने Iran US Conflict को केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

क्या मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ रहा है?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि फिलहाल दोनों पक्ष सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि किसी भी छोटी सैन्य घटना के बड़े संघर्ष में बदलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है या अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच प्रत्यक्ष टकराव होता है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।

 

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