LPG सप्लाई पर संकट के संकेत: ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट से उद्योग, खेती और परिवहन पर पड़ सकता है असर
Signs of a crisis in LPG supply, Disruptions in energy supply could impact industry, agriculture, and transportation.
नई दिल्ली: मार्च 2026 में भारत एक संभावित ऊर्जा चुनौती का सामना करता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Liquefied Petroleum Gas की आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में बाधा की आशंका के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत में आमतौर पर LPG को रसोई गैस के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह ईंधन उद्योग, कृषि, परिवहन और तकनीकी उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गैस आपूर्ति में बाधा आती है तो कई महत्वपूर्ण गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका
आधुनिक खेती में LPG का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कई किसान खरपतवार को नष्ट करने के लिए LPG आधारित फ्लेम वीडर्स का उपयोग करते हैं, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो जाती है। यदि गैस की उपलब्धता कम होती है तो किसानों को फिर से रासायनिक विकल्पों पर निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
टेक्सटाइल और आभूषण उद्योग पर असर
टेक्सटाइल उद्योग में सूती कपड़ों की फिनिशिंग प्रक्रिया के दौरान महीन रेशों को हटाने के लिए LPG की नियंत्रित लौ का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह सोने-चांदी के आभूषण बनाने में धातुओं को पिघलाने और जोड़ने के लिए भी LPG का प्रयोग किया जाता है। गैस की कमी से इन उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
उपभोक्ता उत्पादों और तकनीक में भी उपयोग
कई एरोसोल उत्पाद जैसे डियोड्रेंट, परफ्यूम और रूम फ्रेशनर में दबाव बनाए रखने के लिए LPG का उपयोग प्रोपेलेंट के रूप में किया जाता है। इसके अलावा हाई-टेक उद्योगों में सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रिया में भी LPG का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसकी कमी तकनीकी उत्पादन श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती है।
खाद्य प्रसंस्करण और निर्माण कार्य
फसल कटाई के बाद अनाज, मसालों और फलों को सुरक्षित रखने के लिए औद्योगिक ड्रायर में सुखाया जाता है, जो अक्सर LPG से चलते हैं। इसी तरह कांच और सिरेमिक उद्योग में उच्च तापमान वाली भट्टियों के संचालन में भी गैस का उपयोग होता है। सड़क निर्माण में डामर को गर्म करने के लिए भी LPG आधारित हीटर इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए आपूर्ति में कमी से निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।
परिवहन और सेवाओं पर संभावित प्रभाव
देश के कई शहरों में ऑटो-रिक्शा, टैक्सियां और गोदामों में चलने वाली फोर्कलिफ्ट मशीनें LPG पर निर्भर हैं। गैस की कमी होने पर इन सेवाओं की लागत बढ़ सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ेगा। कुछ अस्पतालों और डेटा केंद्रों में बैकअप ऊर्जा के लिए भी LPG आधारित जनरेटर का उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि LPG को केवल घरेलू ईंधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह ऊर्जा स्रोत देश की उत्पादन प्रणाली, खाद्य सुरक्षा और परिवहन नेटवर्क का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए LPG आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर नहीं किया गया तो इसका प्रभाव उद्योगों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक व्यापक रूप से महसूस किया जा सकता है।


