उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम: नगर पंचायत ने कूड़े से कमाए 8 लाख रुपये, सफाई अभियान बना प्रदेश के लिए मॉडल

Nagar Panchayat earns Rs 8 lakh from garbage, cleanliness drive becomes a model for the state

चमोली: बदरीनाथ धाम में यात्राकाल के दौरान सफाई व्यवस्था को मजबूत रखना हमेशा से एक चुनौती रहा है। लेकिन नगर पंचायत बदरीनाथ ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए कूड़े के प्रभावी प्रबंधन से न केवल धाम को स्वच्छ रखा, बल्कि 8 लाख 89 हजार रुपये से अधिक की आय भी अर्जित की है। यह अनूठा प्रयास अब प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण बन रहा आय का स्रोत

धाम की सफाई का जिम्मा नगर पंचायत के पास है, जिसके लिए यात्राकाल में हर वर्ष पर्यावरण मित्रों की तैनाती की जाती है। पंचायत ने कचरे के निस्तारण हेतु एमआरएफ सेंटर, कॉम्पैक्टर मशीन और ऑर्गेनिक वेस्ट कनवर्टर मशीन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की हैं।
इन मशीनों की मदद से सूखे कचरे को ब्लॉक के रूप में तैयार कर बेचा जाता है, जबकि खाद्य अवशेषों से कम्पोस्ट खाद बनाकर बाजार में उपलब्ध कराई जाती है। इससे धाम की स्वच्छता तो बेहतर हुई ही है, साथ ही आय का नया स्रोत भी विकसित हुआ है।

यात्राकाल में 230 टन कचरे का निस्तारण

नगर पंचायत ने इस वर्ष कुल 230 टन कचरे का सफल निस्तारण किया।

  • 133 टन सूखे कचरे के ब्लॉक तैयार कर बेचे गए।
  • 97 टन गीले कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाई गई।
    इन दोनों से प्राप्त आय 8,89,598 रुपये रही।

इसके अलावा पंचायत ने विभिन्न माध्यमों से उल्लेखनीय आय अर्जित की—

  • ईको पर्यटक शुल्क से: 1 करोड़ 14 लाख 97 हजार 56 रुपये
  • फास्टैग बैरियर से: 92 लाख 60 हजार 796 रुपये
  • हेलीकॉप्टर सेवा शुल्क से: 22 लाख 36 हजार 260 रुपये

नगर पंचायत की यह आर्थिक उपलब्धि बताती है कि योजनाबद्ध कचरा प्रबंधन से बड़े स्तर पर राजस्व उत्पन्न किया जा सकता है।

कपाट बंद होने के बाद भी जारी सफाई और सैनिटाइजेशन

धाम के कपाट बंद होने के बाद भी नगर पंचायत ने सफाई पर कोई कमी नहीं छोड़ी। पर्यावरण मित्रों की टीम ने मंदिर परिसर, ब्रह्म कपाल, तप्त कुंड, बामणी मार्ग, साकेत चौराहा, बद्रीश एवं शेषनेत्र झील के आसपास विस्तृत डीप सैनिटाइजेशन अभियान चलाया। धाम में जमा कचरे को पूरी तरह निस्तारित कर क्षेत्र को सर्दियों के लिए स्वच्छ कर दिया गया है।

क्या है ईको पर्यटक शुल्क?

यह शुल्क बदरीनाथ आने वाले बाहरी वाहनों से लिया जाता है, जिससे प्राप्त धनराशि का उपयोग—

  • सफाई व्यवस्था,
  • पर्यटन सुविधाओं के विकास,
  • और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाता है।

नगर पंचायत बदरीनाथ का यह सफाई मॉडल सिद्ध करता है कि पर्यावरण संरक्षण और आय सृजन एक साथ संभव है, यदि योजना और अमल मजबूत हो।

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