एमसीएक्स पर सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, निवेशक सकते में
Gold and silver prices witness sharp fall on MCX, investors in shock.
नई दिल्ली: सर्राफा बाजार में शुक्रवार को अचानक आए उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को चौंका दिया। बीते कुछ दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची सोने और चांदी की कीमतों में एक ही दिन में तेज गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी लगभग 27% टूटकर 3 लाख रुपये प्रति किलो के नीचे आ गई, जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञ इसे 1980 के दशक के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट बता रहे हैं।
चांदी और सोने का रिकॉर्ड हाई फिसला
गुरुवार को चांदी ने 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, लेकिन शुक्रवार को इसकी कीमत गिरकर लगभग 2.91 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई। सोने में भी दबाव देखा गया। 24 कैरेट सोना गिरकर करीब 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना लगभग 1,91,922 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यह दरें जीएसटी और मेकिंग चार्ज से पहले की हैं।
मुनाफावसूली और डॉलर मजबूती का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के हफ्तों में तेजी के बाद बड़े निवेशकों और संस्थागत खिलाड़ियों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए भारी बिकवाली की। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति में वृद्धि ने भी सोना और चांदी पर दबाव डाला। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग तब कमजोर हो जाती है जब वैश्विक जोखिम में तेजी आती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना 5.31% या 285 डॉलर से ज्यादा गिरकर 5,087 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान यह और नीचे 4,945 डॉलर प्रति औंस तक फिसला। हाजिर चांदी भी 12% से अधिक गिरकर लगभग 101 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि इंट्राडे ट्रेड में इसमें 17% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम का प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राजनीतिक घटनाओं ने भी कीमती धातुओं पर असर डाला। अमेरिका में संभावित शटडाउन को टालने के लिए राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच बनी अस्थायी सहमति के बाद सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई, जिससे सोना और चांदी पर दबाव बढ़ गया।
निवेशकों के लिए सुझाव
विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में सोना और चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशक इसे खरीद का अवसर मान सकते हैं। निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में फैसले न लेने की सलाह दी जा रही है।


