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“रामपुर तिराहा कांड ” में तत्कालीन मंसूरपुर CO की पहचान

298 पुरुष और 47 महिला आंदोलनकारी हिरासत में लिए थे

मुजफ्फरनगर/ उत्तर प्रदेश: अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड गठन की मांग को लेकर आंदोलनकारी विभिन्न वाहनों में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। रामपुर तिराहा पहुंचते ही पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हुई। फायरिंग में सात आंदोलनकारी मारे गए थे। सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी मामले की सुनवाई पॉक्सो ऐक्ट कोर्ट दो के पीठासीनअधिकारी अंजनी कुमार कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर कोर्ट में रामपुर तिराहा कांड की सुनवाई, पूर्व हेड मोहर्रिर ने SO मंसूरपुर रहे राधामोहन द्विवेदी को पहचाना  उत्तराखंड की मांग को लेकर रामपुर तिराहा कांड में तत्कालीन एसओ मंसूरपुर राधा मोहन द्विवेदी ने 298 पुरुष और 47 महिला आंदोलनकारी हिरासत में लिए थे। पुलिस लाइन के पूर्व हेड मोहर्रिर ने कोर्ट में एसओ की पहचान की। बताया गया कि हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलनकारियों को अगले दिन छोड़ दिया गया था। अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी।सोमवार को आंदोलकारियों को हिरासत में लेने वाले थाना मंसूरपुर के तत्कालीन प्रभारी राधा मोहन द्विवेदी पेश हुए। यह था पूरा मामला सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिसकी सुनवाई चल रही है।

अब इन मामलों में चल रही सुनवाई रामपुर तिराहा कांड में सेशन कोर्ट में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में सुनवाई चल रही है जबकि सीबीआई बनाम बृज किशोर और सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली का मजिस्ट्रेट ट्रायल चल रहा है।

एक अक्तूबर 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें 7 आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी । पुलिस लाइन के पूर्व हेड मोहर्रिर रतन स्वरूप सक्सेना ने उनकी शिनाख्त करते हुए कोर्ट को बताया कि दो अक्तूबर को वह आंदोलनकारी 298 पुरुष और 47 महिलाओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन पहुंचे थे। जिन्हें 3 अक्टूबर 1994 को छोड़ दिया गया था। जीडी पर 3 स्थानों पर हस्ताक्षर हैं, जिनमें एक हस्ताक्षर बाकी दो से अलग नजर आते हैं।उत्तराखंड आंदोलन: एक अक्टूबर 1994 का ऐतिहासिक दिन

1 अक्टूबर 1994 का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, उत्तराखंड के अलग राज्य की मांग को लेकर हजारों आंदोलनकारी विभिन्न वाहनों में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार का ध्यान उत्तराखंड के विकास और अलग राज्य की मांग की ओर खींचना था। दिल्ली कूच आंदोलनकारियों ने देहरादून से दिल्ली की ओर कूच किया। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़प हुई।इस आंदोलन के बाद, केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की दिशा में कदम उठाए और अंततः 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड एक अलग राज्य बन गया। तिराहा कांड में तत्कालीन एसओ मंसूरपुर राधा मोहन द्विवेदी ने 298 पुरुष और 47 महिला आंदोलनकारी हिरासत में लिए थे। पुलिस लाइन के पूर्व हेड मोहर्रिर ने कोर्ट में एसओ की पहचान की।

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