क्या 1966 का इतिहास बदलेगा ‘ अबकी बार हरियाणा में
लड़की लड़ी, जीत नहीं सकी ' इस बार 51 महिला राजनैतिक मैदान में
हरियाणा : इस विधानसभा चुनाव में 57 महिला प्रत्याशी हैं, लिहाजा 8 अक्टूबर को आने वाले चुनाव में देखना होगा कि महिला प्रत्याशियों को जनता का कितना समर्थन मिला है।लड़की लड़ी, जीत नहीं सकी 51 महिलाएं लड़ रही हरियाणा विधानसभा चुनाव, 1966 से अब तक का इतिहास बदलेगा इस चुनाव में कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने सीएम बनने की इच्छा जताई है। इस चुनाव का नतीजा 8 अक्टूबर को आएगा। तब पता चलेगा कि कौन से दल की सरकार बनने जा रही है। लेकिन सवाल उठता है कि चाहे किसी भी दल की सरकार बने, क्या हरियाणा की राजनीति में महिलाओं की तस्वीर बदल जाएगी।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान चल रहा है। प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर कुल 1031 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन 1031 प्रत्याशियों में से 51 महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। प्रदेश की राजनीति की बात करें तो महिलाओं को न तो चुनाव में पर्याप्त अवसर मिले और न ही जनता से समर्थन मिला। नतीजा यह हुआ कि हरियाणा के जन्म से लेकर अब तक महज 57 महिलाएं ही विधायक बन सकी। किस दल ने कितनी महिला प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा साल दर साल कम हो रही महिला प्रत्याशियों की संख्या
हरियाणा में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। साल 2019 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो निर्दलीय उम्मीदवारों समेत 104 महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। लेकिन इनमें से महज 9 प्रत्याशियों को जीत मिली थी।
इसी प्रकार 2014 के विधानसभा चुनाव को देखें तो कुल 116 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और 13 महिला प्रत्याशी ही चुनाव जीत सकी थी। क्या इस बार बदलेगी तस्वीर कांग्रेस ने यूपी चुनाव में नारा दिया था ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’, लेकिन कांग्रेस को इस नारे का जरा भी फायदा नहीं मिला। हरियाणा में भी यही स्थिति है। हरियाणाा बनने से लेकर आज तक कोई भी महिला सीएम नहीं बन सकी है।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए कुल 57 महिलाएं बतौर प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने 12, बीजेपी ने 11, इनेलो ने 11, आम आदमी पार्टी ने 10 और जेजेपी-एएसपी गठबंधन ने 8 महिला प्रत्याशियों को उतारा है


