उत्तराखंड

Uttarakhand Tourism: मदकोट में बनेंगे जियोथर्मल पूल, गर्म पानी के कुंडों से बढ़ेगा पर्यटन, स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर

Geothermal pools will be built in Madkot, tourism will increase with hot water pools, local people will get employment opportunities.

देहरादून: उत्तराखंड के प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत अब पर्यटन विकास की नई पहचान बन सकते हैं। राज्य में जियोथर्मल स्प्रिंग्स यानी प्राकृतिक गर्म कुंडों का इस्तेमाल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय पर्यटकों को आकर्षित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत पिथौरागढ़ जिले के मदकोट में गर्म पानी के स्रोत के आसपास स्नान और ठहरने की सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत जियोथर्मल पूल, कॉटेज और अन्य पर्यटक सुविधाएं तैयार करने की संभावना है।

सरकार का मानना है कि इस पहल से सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय होटल, होमस्टे, खानपान और परिवहन कारोबार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

मदकोट में विकसित होंगी आधुनिक पर्यटक सुविधाएं

पिथौरागढ़ जिले का मदकोट अपने प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों के लिए जाना जाता है। अब इन स्रोतों को व्यवस्थित पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित योजना में पर्यटकों के लिए गर्म पानी में स्नान की सुविधा के साथ ठहरने के इंतजाम भी शामिल हैं।

उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के मुताबिक, मदकोट को नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। यहां कॉटेज और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार हो रहा है। महिला और पुरुष पर्यटकों के लिए अलग-अलग स्नान स्थलों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

परियोजना शुरू करने से पहले पानी की गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी।

उत्तराखंड में चिह्नित हैं 40 जियोथर्मल स्प्रिंग्स

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर कुमार तिवारी के अनुसार, अध्ययन के दौरान उत्तराखंड में 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स की पहचान की गई है। राज्य में कुछ अन्य गर्म पानी के स्रोत भी हो सकते हैं, जिन्हें अभी चिह्नित किया जाना बाकी है।

उन्होंने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र में गोरी नदी के आसपास लगभग 13 किलोमीटर लंबी जियोथर्मल बेल्ट मौजूद है। इस क्षेत्र में कई गर्म पानी के स्रोत हैं, जिनका इस्तेमाल पर्यटन के साथ कृषि, ग्रीनहाउस और अन्य गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।

पर्यटन के साथ ऊर्जा और खेती में भी उपयोगी

जियोथर्मल स्प्रिंग्स का उपयोग दुनिया के कई हिस्सों में स्नान और स्पा सुविधाओं के अलावा घरेलू हीटिंग तथा ग्रीनहाउस में तापमान नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। उपयुक्त परिस्थितियों में इनका इस्तेमाल कृषि और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों में भी हो सकता है।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में सर्दियों के दौरान गर्म पानी और हीटिंग की सुविधाएं पर्यटन कारोबार के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक स्थान पर इन स्रोतों का इस्तेमाल वहां की भूगर्भीय स्थिति, पानी की रासायनिक संरचना और पर्यावरणीय सुरक्षा के अध्ययन के बाद ही किया जा सकता है।

तप्त कुंडों से पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों को पर्यटकों के लिए उपयोगी बताया है। उन्होंने बदरीनाथ धाम के पास स्थित तप्त कुंड का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। इसी तरह राज्य के अन्य उपयुक्त गर्म पानी के स्रोतों को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म पानी के कुंडों पर आधारित पर्यटन सुविधाएं तनाव कम करने और आराम पाने के अनुभव के लिए लोकप्रिय हो सकती हैं। हालांकि, पानी में मौजूद खनिजों के आधार पर किसी बीमारी के इलाज या स्वास्थ्य लाभ का दावा करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और सुरक्षा संबंधी जांच जरूरी है।

स्थानीय रोजगार के खुल सकते हैं नए रास्ते

मदकोट में प्रस्तावित परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में राज्य के दूसरे उपयुक्त गर्म पानी के स्रोतों को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा सकता है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

फिलहाल, परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पानी की जांच और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का अध्ययन अहम होगा। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मदकोट में जियोथर्मल पूल और अन्य पर्यटक सुविधाओं को किस तरह विकसित किया जाएगा।

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