उत्तराखंड

Uttarakhand SIR: तीन जिलों में वोट काटने की सबसे ज्यादा आपत्तियां, एक नाम से 5906 शिकायतों ने बढ़ाई चिंता

Uttarakhand SIR: Highest number of objections regarding voter deletions in three districts; 5,906 complaints concerning a single name raise concerns.

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सामने आई आपत्तियों में नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार सबसे आगे हैं। इन तीन जिलों में फॉर्म-10 के माध्यम से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं। खास बात यह है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आई हैं, जिससे निर्वाचन आयोग की चिंता बढ़ गई है।

सबसे ज्यादा चर्चा ऊधमसिंह नगर की किच्छा विधानसभा सीट की हो रही है, जहां एक ही नाम से हजारों आपत्तियां दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। निर्वाचन अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि वास्तविक रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे।

नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार पर आयोग की विशेष नजर

Uttarakhand SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सबसे अधिक आपत्तियां तीन जिलों में दर्ज हुई हैं। इनमें नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार शामिल हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में फॉर्म-10 दाखिल किए जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने विशेष निगरानी बढ़ा दी है।

निर्वाचन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ ऐसे मतदाताओं की पहचान करनी है जो वास्तव में स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं या अब संबंधित पते पर निवास नहीं करते। दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना है कि किसी राजनीतिक या अन्य उद्देश्य से की गई आपत्ति के आधार पर किसी वास्तविक मतदाता का नाम प्रभावित न हो।

इसी वजह से इन तीन जिलों में SIR की प्रक्रिया को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किच्छा में एक नाम से 5906 आपत्तियां

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा किच्छा विधानसभा क्षेत्र की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यहां राजेश तिवारी नाम से 5906 आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। एक ही नाम से इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों के लिए इन शिकायतों की प्रकृति और आधार की जांच करना अहम हो गया है।

हालांकि, केवल बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। प्रत्येक मामले में संबंधित मतदाता को प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

यही कारण है कि Uttarakhand SIR में आपत्तियों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका सत्यापन और सुनवाई मानी जा रही है।

40,906 मतदाताओं को लेकर भी सामने आई आपत्तियां

SIR प्रक्रिया में अनुपस्थित या दूसरी जगह चले गए मतदाताओं को लेकर भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 40,906 लोगों के घर पर नहीं मिलने या दूसरी जगह स्थानांतरित होने को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 2,575 मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने की अलग शिकायतें भी सामने आई हैं।

अब निर्वाचन अधिकारियों को यह सत्यापित करना होगा कि संबंधित मतदाता वास्तव में अपने दर्ज पते पर रह रहा है या नहीं। यदि कोई व्यक्ति स्थायी रूप से दूसरी जगह चला गया है तो मतदाता सूची में उसके पुराने पते से जुड़ी स्थिति की नियमानुसार समीक्षा की जाएगी।

लेकिन इस प्रक्रिया में जल्दबाजी से बचना भी जरूरी है, क्योंकि केवल घर पर किसी व्यक्ति के नहीं मिलने को स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

आपत्ति दर्ज होना नाम कटने की गारंटी नहीं

SIR को लेकर आम मतदाताओं के बीच सबसे बड़ी चिंता नाम कटने को लेकर है। निर्वाचन प्रक्रिया में किसी मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज होना अपने आप नाम हटने का अंतिम आधार नहीं है।

Uttarakhand SIR के तहत संबंधित मतदाता और आपत्तिकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नोटिस और सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। दस्तावेजों, निवास की स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद ही मामले पर निर्णय लिया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक रूप से अपात्र या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान हो, लेकिन पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो।

तीन जिलों में नौ अधिकारियों की विशेष निगरानी

बड़ी संख्या में आपत्तियों को देखते हुए तीन जिलों में निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में विशेष निगरानी के लिए नौ IAS और PCS अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है।

इन अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पर नजर रखना और यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन हो।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक दावे और आपत्ति की नियमानुसार सुनवाई की जाए। किसी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।

ज्यादा बदलाव वाले बूथों पर भी विशेष निगरानी

SIR के दौरान ऐसे बूथों को भी चिन्हित किया जा रहा है जहां मतदाता संख्या में सामान्य से अधिक बदलाव की संभावना दिखाई दे रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन बूथों पर चार प्रतिशत से अधिक परिवर्धन और दो प्रतिशत से अधिक अपमार्जन की संभावना है, वहां निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करें।

इसका उद्देश्य अचानक होने वाले बड़े बदलावों की वजह को समझना और रिकॉर्ड का आवश्यक सत्यापन करना है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मतदाता सूची में बदलाव वास्तविक परिस्थितियों के कारण हुआ है या किसी प्रक्रिया संबंधी समस्या की वजह से।

राजनीतिक विवाद भी बढ़ने की आशंका

Uttarakhand SIR के दौरान सामने आई बड़ी संख्या में आपत्तियों ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। विपक्षी दल पहले से ही मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में एक ही नाम से हजारों आपत्तियां सामने आने का मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है।

दूसरी ओर निर्वाचन आयोग का जोर प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा करने पर है। किसी भी मतदाता का नाम केवल आरोप या आपत्ति के आधार पर हटाया जाना नहीं है। सत्यापन और सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती

वर्तमान परिस्थितियों में निर्वाचन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सटीकता और निष्पक्षता के बीच संतुलन बनाए रखने की है। मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम नहीं रहने चाहिए जो स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही पात्र मतदाताओं का नाम किसी गलती या गलत आपत्ति के कारण नहीं हटना चाहिए।

इसी वजह से नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में चल रही प्रक्रिया पर विशेष नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में सुनवाई और सत्यापन के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि कितने मामलों में वास्तव में मतदाता दूसरी जगह स्थानांतरित मिले और कितनी आपत्तियां सही नहीं पाई गईं।

अंतिम सूची से पहले हर मामले की होगी जांच

Uttarakhand SIR की अंतिम प्रक्रिया में अब दावों और आपत्तियों का निस्तारण सबसे महत्वपूर्ण चरण है। निर्वाचन विभाग को बड़ी संख्या में प्राप्त मामलों की जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करनी होगी।

किच्छा में राजेश तिवारी के नाम से दर्ज 5906 आपत्तियों ने इस पूरी प्रक्रिया को खास चर्चा में ला दिया है। हालांकि, अंतिम निर्णय प्रत्येक मामले की सुनवाई और सत्यापन के बाद ही होगा।

फिलहाल नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में SIR के तहत सबसे ज्यादा आपत्तियां सामने आने के बाद इन जिलों पर निर्वाचन आयोग की विशेष निगरानी है। अब देखना होगा कि जांच और सुनवाई के बाद इनमें से कितनी आपत्तियां सही साबित होती हैं और कितने मामलों में मतदाता सूची में बदलाव की जरूरत पड़ती है।

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