SDM Dance Video Viral: मेले में डांस करना SDM को पड़ा भारी? वीडियो वायरल होते ही DM ने बैठाई जांच!
SDM Dance Video Viral: Did dancing at a fair land the SDM in trouble? DM orders a probe as the video goes viral!
SDM Dance Video Viral: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में आयोजित मिनी सरस मेले का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मेले की सांस्कृतिक संध्या के दौरान रामनगर के उपजिलाधिकारी (SDM) गोपाल सिंह चौहान मंच पर पहुंचकर लोक कलाकार के साथ डांस करते नजर आए। जौनसारी लोकगीत की धुन पर अधिकारी के थिरकने का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
वीडियो वायरल होने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह देखा जाएगा कि जिस समय SDM मंच पर मौजूद थे, उस समय उनकी ड्यूटी की स्थिति क्या थी और कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी किस आधिकारिक भूमिका में थी।
मिनी सरस मेले में हुआ पूरा मामला क्या है?
रामनगर में आयोजित मिनी सरस मेले में स्थानीय संस्कृति और लोक कला से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। मेले की दूसरी शाम कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी संस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने के लिए पहुंचे थे।
इसी दौरान प्रसिद्ध लोक कलाकार श्वेता महारा की प्रस्तुति चल रही थी। जौनसारी गीत पर दर्शक भी उत्साह में नजर आ रहे थे। कार्यक्रम के दौरान कलाकार ने रामनगर के SDM गोपाल सिंह चौहान से मंच पर आने का आग्रह किया। इसके बाद SDM मंच पर पहुंचे और गीत की धुन पर कलाकार के साथ डांस किया।
मंच पर अधिकारी का यह अंदाज वहां मौजूद लोगों के लिए मनोरंजन का हिस्सा रहा, लेकिन कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला अलग चर्चा में आ गया। वीडियो को लेकर कुछ लोगों ने अधिकारी के इस व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने इसे स्थानीय संस्कृति और लोक कार्यक्रम में सहज भागीदारी बताया।
वीडियो वायरल होते ही बढ़ी चर्चा
SDM Dance Video Viral होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। वीडियो में SDM को लोकगीत की धुन पर नृत्य करते देखा जा सकता है। वीडियो के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जिस समय अधिकारी मंच पर थे, क्या उस समय वे सरकारी ड्यूटी पर थे?
मामले की गंभीरता इसी बिंदु से जुड़ी हुई है। किसी अधिकारी का सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होना और ड्यूटी के दौरान आधिकारिक जिम्मेदारियों को छोड़कर मंच पर प्रदर्शन करना, दोनों परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसी वजह से प्रशासन ने सीधे तौर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पहले तथ्यात्मक जांच कराने का फैसला किया है।
नैनीताल DM ने दिए जांच के निर्देश
वीडियो सामने आने के बाद नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मामले पर संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों को देखा जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
जांच का मुख्य बिंदु यह रहेगा कि वीडियो कब बनाया गया था। इसके साथ यह भी पता लगाया जाएगा कि उस समय SDM गोपाल सिंह चौहान आधिकारिक ड्यूटी पर थे या कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति किसी अन्य कारण से थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, किसी वायरल वीडियो के आधार पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय उसकी परिस्थितियों और वास्तविक संदर्भ को समझना जरूरी है। इसी आधार पर जांच के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।
सरकारी आचरण नियमावली भी चर्चा में
मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में सरकारी अधिकारियों के लिए लागू आचरण नियम भी चर्चा में आ गए हैं। प्रदेश के प्रांतीय सिविल सेवा अधिकारियों पर उत्तराखंड राज्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 2002 लागू होती है।
सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय अनुशासन और सेवा आचरण के निर्धारित मानकों का पालन करें। ऐसे में यदि कोई अधिकारी सरकारी ड्यूटी के दौरान किसी गतिविधि में शामिल होता है, तो उसकी परिस्थितियों और भूमिका का मूल्यांकन सेवा नियमों के आधार पर किया जा सकता है।
हालांकि, इस मामले में यह तय करना अभी बाकी है कि SDM का मंच पर जाना वास्तव में सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन था या फिर सांस्कृतिक कार्यक्रम में सामान्य सहभागिता। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
क्या SDM के खिलाफ होगी कार्रवाई?
फिलहाल SDM गोपाल सिंह चौहान के खिलाफ किसी अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अधिकारी उस समय किस स्थिति में थे और उनका मंच पर जाना उनकी आधिकारिक जिम्मेदारी के दायरे में आता था या नहीं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि अधिकारी ड्यूटी के दौरान ऐसी गतिविधि में शामिल हुए जो सरकारी आचरण नियमों के विपरीत थी, तो प्रशासन नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। वहीं, अगर यह साबित होता है कि अधिकारी कार्यक्रम में निर्धारित भूमिका के तहत मौजूद थे और उनका डांस केवल सांस्कृतिक सहभागिता का हिस्सा था, तो मामला अलग तरीके से देखा जा सकता है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सभी की नजर
SDM Dance Video Viral मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और सरकारी अधिकारियों के सार्वजनिक आचरण को लेकर बहस छेड़ दी है। किसी अधिकारी की सार्वजनिक गतिविधि को लेकर सवाल उठने पर केवल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता। वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, अधिकारी की ड्यूटी क्या थी और कार्यक्रम में उनकी भूमिका क्या थी, इन सभी पहलुओं को देखना जरूरी होगा।
फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। रामनगर के मिनी सरस मेले में हुआ यह डांस अब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी सेवा आचरण और अधिकारियों की सार्वजनिक भूमिका को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।



