उत्तराखंड

रामनगर में बाघ का खौफ, एक सप्ताह में तीन हमले, दो मौतों से इलाके में दहशत

Tiger terror in Ramnagar, Three attacks in a week, two deaths cause panic in the area.

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बार फिर गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है। रामनगर क्षेत्र में बीते एक सप्ताह के भीतर बाघ ने लगातार तीन लोगों पर हमला किया है, जिनमें दो की जान जा चुकी है। ताजा घटना में बिहार से आए एक मजदूर को बाघ ने जंगल में घसीटकर मौत के घाट उतार दिया। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है, वहीं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठने लगे हैं।

निर्माण कार्य के दौरान अचानक हमला

ताजा मामला रामनगर की देचोरी रेंज के भलोन इलाके का बताया जा रहा है। यहां सिंचाई विभाग से जुड़े कार्य में लगे एक मजदूर पर रविवार शाम बाघ ने अचानक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूर अपने अन्य साथियों के साथ काम कर रहा था, तभी घात लगाए बैठे बाघ ने उस पर झपट्टा मारा और जंगल की ओर ले गया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और मजदूरों में भय फैल गया।

सर्च ऑपरेशन के बाद मिला शव

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। ड्रोन कैमरों, हाथियों और वन कर्मियों की मदद से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कई घंटों की तलाश के बाद जंगल के भीतर से मजदूर का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान बिहार निवासी 30 वर्षीय अभिमन्यु कुमार के रूप में हुई है, जो जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कार्य में लगा था। शव मिलने के बाद इलाके में शोक के साथ आक्रोश भी फैल गया।

एक हफ्ते में तीसरी घटना से बढ़ी चिंता

रामनगर क्षेत्र में यह एक सप्ताह के भीतर बाघ के हमले की तीसरी घटना है। इससे पहले टोटाम के क्यारी गांव में एक व्यक्ति पर हमला हुआ था, जबकि सांवल्दे इलाके में 65 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों को आशंका है कि क्षेत्र में कोई आदमखोर बाघ सक्रिय है, जो आबादी वाले इलाकों में घूम रहा है।

ग्रामीणों का गुस्सा, वन विभाग पर आरोप

लगातार हो रहे हमलों से स्थानीय लोगों में भय के साथ-साथ गहरी नाराजगी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठा पाया। जंगल से सटे गांवों में गश्त कमजोर होने का आरोप लगाते हुए लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।

सुरक्षा बढ़ाने की उठी मांग

ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों ने क्षेत्र में नियमित गश्त, पिंजरे लगाने और ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि खेतों में काम करना, जंगल के रास्तों से गुजरना और निर्माण कार्य करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। समय रहते कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बाघ की मूवमेंट पर निगरानी के लिए अतिरिक्त कैमरे लगाए जा रहे हैं और विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। विभाग ने प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रयासों का दावा किया है।

बढ़ती चुनौती बना मानव-वन्यजीव संघर्ष

रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में बाघ के हमलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। लगातार हो रही घटनाओं ने पूरे इलाके को डर के साये में ला दिया है, और अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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