उत्तराखंड

उदकोटी का सरकारी विद्यालय बना शिक्षा की मिसाल, समर्पित शिक्षक और समाजसेवी की मेहनत से बदली तस्वीर

Udkoti government school has become an example of education, transformed by the hard work of a dedicated teacher and social worker.

उत्तरकाशी: जहां पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं, वहीं उत्तरकाशी जनपद के छोटे से गांव उदकोटी का राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय शिक्षा की नई मिसाल बन चुका है। कभी जर्जर हालत में खड़ा यह स्कूल अब क्षेत्र का प्रतिष्ठित विद्यालय बन गया है और अभिभावकों की पहली पसंद भी बन चुका है। यह कहानी है प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत और लंदन के समाजसेवी राज भट्ट के समर्पण और मेहनत की।


छोटे गांव में बड़ी उपलब्धि

पुरोला ब्लॉक के इस विद्यालय में वर्तमान में 72 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो ब्लॉक के किसी भी अन्य सरकारी स्कूल से अधिक हैं। विद्यालय की ख्याति इतनी बढ़ चुकी है कि आसपास के गांवों के अभिभावक भी अपने बच्चों को यहां भेजना चाहते हैं। बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन और संस्कारों के साथ-साथ उन्हें सैनिक स्कूल और राजीव गांधी नवोदय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रवेश परीक्षा में सफलता भी मिल रही है।


समाजसेवी का योगदान

जब विद्यालय की सफलता की चर्चा लंदन के व्यवसायी और समाजसेवी राज भट्ट तक पहुंची, तो उन्होंने स्वयं स्कूल का दौरा किया। बच्चों का उत्साह और विद्यालय का माहौल देखकर उन्होंने स्कूल की मदद का जिम्मा अपने हाथ में लिया। उन्होंने एक अतिरिक्त शिक्षक, नया कक्षा-कक्ष, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान की, जिससे विद्यालय की शिक्षा और सुविधाओं में सुधार हुआ।


प्रधानाध्यापक का समर्पण

विद्यालय को सुधारने का असली श्रेय प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत को जाता है। 2016 में जब उनका तबादला यहां हुआ, तब स्कूल की हालत बेहद खराब थी। उन्होंने सीमित संसाधनों में चारदीवारी, मरम्मत और साफ-सफाई का काम किया। बच्चों में अनुशासन और पढ़ाई की भावना पैदा की। उनके प्रयासों से स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ी और विद्यालय क्षेत्र में आदर्श बन गया।


टीमवर्क और समाज की भागीदारी

आज विद्यालय में पांच सरकारी शिक्षक और एक अतिरिक्त शिक्षक, जिन्हें राज भट्ट ने नियुक्त किया, बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल, संस्कृति और अनुशासन की सीख दे रहे हैं। प्रधानाध्यापक बताते हैं कि शिक्षक-अभिभावक संघ भी सक्रिय है और हाल ही में स्थानीय शिक्षक की नियुक्ति भी समाज की भागीदारी से हुई।


सरकारी स्कूल की नई पहचान

उदकोटी विद्यालय साबित करता है कि यदि शिक्षक समर्पित हों और समाज सहयोग करे, तो सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों से कम नहीं। यहां शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों का आत्मविश्वास किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान से पीछे नहीं है। यह स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र बन चुका है, जहां बच्चों के सपनों और उम्मीदों को पंख मिल रहे हैं।

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