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देवपहरी: छत्तीसगढ़ का अद्भुत पर्यटन स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक मान्यताओं का संगम

Devpahari: A wonderful tourist destination of Chhattisgarh, a confluence of natural beauty and mythological beliefs

कोरबा: काले हीरे की धरती से पर्यटन का नगीना

छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला अपने कोयले के विशाल भंडार और बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यह जिला अपने प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है। हाल के वर्षों में कोरबा से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित देवपहरी जलप्रपात की ख्याति तेजी से बढ़ी है।

देवपहरी: प्राकृतिक सौंदर्य और पौराणिक महत्व का संगम

देवपहरी जलप्रपात न केवल अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह पौराणिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे और राक्षसों के आतंक से इस क्षेत्र को मुक्त कराया था

कैसे पहुंचे देवपहरी?

देवपहरी तक पहुंचने के लिए दो मुख्य मार्ग हैं:

  1. बालको होते हुए घाटियों वाला मार्ग
  2. रूमगड़ा हवाई पट्टी की ओर से जाने वाला मार्ग (जो अधिक सुगम माना जाता है)

देवपहरी का मुख्य जलप्रपात चोरनई नदी पर स्थित है, जो हसदेव नदी की सहायक नदी है। यहां कई छोटे-बड़े सहायक जलप्रपात भी मौजूद हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।

घने जंगलों और हाथी रिजर्व का हिस्सा

देवपहरी का पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है, जो लेमरू हाथी रिजर्व का भी हिस्सा है। यह क्षेत्र हसदेव अरण्य का प्रमुख हिस्सा है और इसे ‘मध्य भारत का फेफड़ा’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के घने जंगल पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

देवपहरी क्षेत्र में कई पुरातात्विक और धार्मिक स्थल हैं:

  • महादेवपहरी: यहां 11वीं-12वीं शताब्दी के शिव मंदिर के अवशेष मौजूद हैं।
  • रॉक आर्ट शेल्टर: इस क्षेत्र में आदिमानवों द्वारा बनाए गए शैलचित्र भी पाए गए हैं।
  • राक्षसों की गुफा: मान्यता है कि यहां राक्षसों का निवास था, जिन्हें भगवान राम ने परास्त किया था
  • श्रीराम की कुटिया और लक्ष्मण बैठकी: यहां वह स्थान मौजूद है, जहां श्रीराम ने वनवास के दौरान विराम लिया था

देवपहरी: आस्था और पर्यावरण का केंद्र

यहां एक गोमुखी नाला भी है, जिसे लेकर आदिवासियों में मान्यता है कि इसमें स्नान करने से गौहत्या का पाप मिट जाता है। देवपहरी में स्थित गोविंद झुंज जलप्रपात और अन्य सहायक जलधाराएं हसदेव नदी से जुड़ी हुई हैं

पर्यटकों के लिए एक शानदार अनुभव

देवपहरी घूमने आए पर्यटकों ने इसे प्राकृतिक सुंदरता और अध्यात्म का अद्भुत मेल बताया।

  • राजकुमारी: “यह जगह बहुत ही खूबसूरत है। हमें यहां आकर शांति और सुकून मिला।”
  • रामप्रवेश: “झरने का नजारा बेहद मनमोहक है। यहां पहली बार आया हूं और यह अनुभव अविस्मरणीय है।”
  • एल.एन. जायसवाल: “यह जलप्रपात पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। लोगों को यहां जरूर आना चाहिए।”

सावधानी जरूरी

हालांकि यह स्थान प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुंदर है, लेकिन यह थोड़ा जोखिम भरा भी हो सकता है। प्रशासन ने यहां सावधानी बरतने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए हैं, क्योंकि झरने के पास फिसलन वाले पत्थर हैं

देवपहरी: पर्यटन, आस्था और प्रकृति का अद्भुत मेल

देवपहरी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर भी है। यहां के घने जंगल, सदानीरा नदियां, झरने और पौराणिक स्थल इसे छत्तीसगढ़ का एक अनोखा पर्यटन स्थल बनाते हैं। यदि आप प्रकृति और इतिहास प्रेमी हैं, तो देवपहरी की यात्रा अवश्य करें! 🌿💧

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