Rishikesh Bypass 4-Lane Project: ऋषिकेश को जाम से मिलेगी मुक्ति, धामी सरकार की बड़ी जीत, 4-लेन बाईपास के लिए केंद्र से ₹1,105 करोड़ की भारी-भरकम मंजूरी
Rishikesh Bypass 4-Lane Project: Rishikesh will get relief from traffic jams, a big victory for the Dhami government, a huge approval of ₹1,105 crore from the center for the 4-lane bypass.
उत्तराखंड की ‘योग नगरी’ ऋषिकेश में अब घंटों लंबे ट्रैफिक जाम बीते दिनों की बात होने वाले हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रभावी पैरवी और केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय का बड़ा सुखद परिणाम सामने आया है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (NH-7) पर ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण के लिए 1105.79 करोड़ रुपये की प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल ऋषिकेश शहर का बोझ कम होगा, बल्कि चारधाम यात्रा पर जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं का सफर भी सुगम हो जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी का ‘कनेक्टिविटी’ विजन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार राज्य के शहरी और दूरस्थ क्षेत्रों को एक मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बाईपास केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास की नई जीवनरेखा साबित होगा।”
मुख्यमंत्री ने इस सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में आधुनिक सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है।
परियोजना का खाका, कहाँ से कहाँ तक बनेगा बाईपास?
ऋषिकेश बाईपास परियोजना एक रणनीतिक रूट पर आधारित है जो शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों को पूरी तरह बाईपास कर देगी।
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विस्तार: यह 4-लेन बाईपास एनएच-7 पर टीनपानी फ्लाईओवर (किमी 529.750) से शुरू होकर खरासोटे पुल (किमी 542.420) तक विकसित किया जाएगा।
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कुल लंबाई: इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 12.670 किलोमीटर होगी।
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प्रभावित क्षेत्र: यह महत्वपूर्ण मार्ग भट्टोवाला और ढालवाला गांवों के बीच से होकर गुजरेगा, जिससे स्थानीय कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा।
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निर्माण मोड: इसे EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) मोड पर बनाया जाएगा, जिसका अर्थ है कि गुणवत्ता और समय सीमा की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी।
3 साल का ‘डेडलाइन’ और सख्त बजट नियंत्रण
केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए बजट को बहुत ही संतुलित तरीके से आवंटित किया है। पहले इसका अनुमानित बजट 1151.18 करोड़ रुपये था, जिसे गहन समीक्षा के बाद संशोधित कर 1105.79 करोड़ रुपये पर अंतिम रूप दिया गया है।
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समय सीमा: मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस कार्य को तीन वर्षों के भीतर पूरा करना होगा।
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नो एक्स्ट्रा कॉस्ट: कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की लागत वृद्धि (Cost Overrun) या समय में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
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पारदर्शिता: निविदाएं (Tenders) पूरी तरह ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
चारधाम यात्रा और पर्यटन को मिलेगा ‘बूस्टर’
ऋषिकेश को ‘चारधाम का द्वार’ कहा जाता है। यात्रा सीजन के दौरान नीलकंठ महादेव, बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले वाहनों के कारण ऋषिकेश की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बचती।
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जाम से राहत: इस बाईपास के बनने से भारी वाहन और लंबी दूरी के यात्री शहर के भीतर प्रवेश किए बिना सीधे आगे निकल सकेंगे।
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समय की बचत: ऋषिकेश पार करने में लगने वाला 1 से 2 घंटे का समय घटकर मात्र 15-20 मिनट रह जाएगा।
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प्रदूषण में कमी: शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम होने से ध्वनि और वायु प्रदूषण में भी भारी गिरावट आएगी।
वित्त वर्ष 2025-26 के बजट से होगा व्यय
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए धन की व्यवस्था भारत सरकार के वित्त वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान (GBS) के अंतर्गत की गई है। देहरादून स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को इस कार्य के लिए ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) नियुक्त किया गया है, जिससे फंड की निकासी और कार्य की प्रगति में तेजी आएगी।
परियोजना का सारांश (तालिका):
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| परियोजना का नाम | ऋषिकेश बाईपास 4-लेन निर्माण (NH-7) |
| स्वीकृत राशि | ₹1105.79 करोड़ |
| कुल लंबाई | 12.670 किलोमीटर |
| कार्य की अवधि | 03 वर्ष |
| मुख्य मार्ग | टीनपानी फ्लाईओवर से खरासोटे पुल तक |
| निर्माण का तरीका | EPC मोड (Engineering, Procurement, Construction) |

