तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं का आंकड़ा एक लाख पार, पर्यटन को मिली नई उड़ान
The number of devotees in Tungnath Dham crossed one lakh, tourism got a new boost
रुद्रप्रयाग: हिमालय की गोद में चंद्रशिला की तलहटी पर विराजमान तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। कपाट बंद होने से पहले यहां तीर्थयात्रियों का यह आंकड़ा एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है। तुंगनाथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन रही है, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बड़ा संबल मिला है।
आपदा के बाद भी लौटी रौनक
हाल ही में उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई आपदा के बाद तुंगनाथ धाम की यात्रा पर असर पड़ा था और श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट देखी गई थी। लेकिन अगस्त के अंतिम सप्ताह से मौसम के खुशनुमा होने के चलते यात्रियों की भीड़ एक बार फिर बढ़ने लगी है। घाटी में लगातार पहुंच रहे श्रद्धालु और पर्यटक यात्रा पड़ावों में रौनक ला रहे हैं।
यात्रियों का विस्तृत आंकड़ा
मंदिर समिति और प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 1,02,330 तीर्थयात्री तुंगनाथ धाम पहुंच चुके हैं। इनमें से 50,185 पुरुष, 42,183 महिलाएं, 9,677 बच्चे, 274 साधु-संन्यासी और 11 विदेशी यात्री शामिल हैं। यह विविधतापूर्ण सहभागिता दर्शाती है कि तुंगनाथ धाम न केवल देशभर बल्कि विदेश से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचने से घाटी के पर्यटन कारोबार में भी इजाफा हुआ है। होटल, गेस्ट हाउस, ढाबे और परिवहन सेवाएं सक्रिय हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आय में भी वृद्धि हुई है। मंदिर समिति की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भविष्य में यात्रा सुविधाओं को और बेहतर बनाने में सहायक होगी।
चंद्रशिला का आकर्षण
श्रद्धालु केवल तुंगनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर ही नहीं लौटते, बल्कि चंद्रशिला की खूबसूरती का आनंद लेने भी जाते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों यात्री शिखर पर पहुंचकर हिमालयी दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य से रूबरू हो रहे हैं। हालांकि मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि सीधे चोपता से चंद्रशिला तक जाने वाले पर्यटकों का रिकॉर्ड आधिकारिक संख्या में शामिल नहीं किया जाता।
आगे की संभावना
2 मई को कपाट खुलने के बाद से ही प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं। यदि यह रफ्तार बनी रही तो कपाट बंद होने तक तुंगनाथ यात्रा एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना सकती है। तुंगनाथ धाम की यह लोकप्रियता उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देती है और आने वाले समय में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान कर सकती है।

