अनंतनाग, 25 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद घाटी में आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी है। इस बार विरोध की कमान अनंतनाग की स्कूली छात्राओं ने संभाली है। बुर्का पहने इन साहसी बेटियों ने आतंक के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन न केवल आतंक के खिलाफ गुस्से का इज़हार था, बल्कि घाटी में बदलती सोच का संकेत भी है।
नारे नहीं, नया नज़रिया
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने हाथों में तख्तियां लेकर “आतंकवाद मुर्दाबाद”, “हमें चाहिए शांति, खून नहीं” और “कश्मीर को चाहिए तरक्की, न कि तबाही” जैसे नारे लगाए। उनकी आवाज में डर नहीं, बल्कि बदलाव की उम्मीद थी। यह कश्मीरी युवतियों का साहसिक कदम दर्शाता है कि अब घाटी की नई पीढ़ी नकारात्मकता को ठुकराकर रौशनी की ओर बढ़ना चाहती है।
पहलगाम हमले से उपजी नाराज़गी
हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई निर्दोष लोग और सुरक्षा बल घायल हुए थे। इस घटना ने घाटी के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इस बार घाटी खामोश नहीं रही, बल्कि आम लोग भी खुलकर आतंकवाद के खिलाफ सामने आ रहे हैं। यह संकेत है कि अब कश्मीर की जनता अमन और स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोषों पर हमला कायरता है और आतंक के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कश्मीर के युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा और विकास के मार्ग पर चलें और आतंक को पूरी तरह नकारें।
महिलाओं की नई भूमिका
अनंतनाग की बेटियों का यह शांतिपूर्ण विरोध घाटी में महिलाओं की नई भूमिका को उजागर करता है। अब ये बेटियां सिर्फ शिक्षा में नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और बदलाव की आवाज बन चुकी हैं। उनके साहस और संकल्प ने साबित कर दिया कि घाटी अब आतंक के साए से बाहर निकलने को तैयार है।
नया कश्मीर, नई सोच
यह प्रदर्शन एक संकेत है उस बदलाव का, जो कश्मीर में आकार ले रहा है। यह आवाज है उस नई पीढ़ी की, जो अब खामोश नहीं रहेगी। आतंक के खिलाफ बेटियों की हुंकार, कश्मीर को नई दिशा की ओर ले जा रही है।

