उत्तराखंड

उत्तराखंड में ट्रैकिंग गतिविधियों को लेकर सख्त नियमावली, साहसिक पर्यटन को मिलेगा सुरक्षित ढांचा

Strict regulations for trekking activities in Uttarakhand; adventure tourism to get a safer framework.

देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य में ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन को सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पहली बार ट्रैकिंग से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है, जिससे प्रदेश में आने वाले देशी-विदेशी ट्रैकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस नियमावली के लागू होने के बाद जहां ट्रैकिंग अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगी, वहीं बिना नियमों के ट्रैकिंग कराना संभव नहीं रहेगा।

अब बिना नियमों के नहीं होगी ट्रैकिंग

अब तक उत्तराखंड में ट्रैकिंग कराने के लिए कोई ठोस और एकरूप नियम नहीं थे। कई एजेंसियां बिना पंजीकरण और न्यूनतम सुरक्षा मानकों के ट्रैकिंग कराती थीं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था। नई नियमावली के तहत ट्रैकिंग कराने वाली सभी एजेंसियों, टूर ऑपरेटर्स और कंपनियों को निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड ट्रैकिंग नियमावली 2026 का ड्राफ्ट तैयार

सरकार ने ‘उत्तराखंड ट्रैकिंग नियमावली 2026’ का ड्राफ्ट लगभग तैयार कर लिया है। पर्यटन विभाग ने इस नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले ट्रैकिंग एसोसिएशन, टूर ऑपरेटर्स, गाइड्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की है, ताकि नियम व्यवहारिक और प्रभावी बन सकें। आने वाले समय में माउंटेनियरिंग गतिविधियों के लिए भी अलग नियमावली लाने की योजना है।

पंजीकरण होगा अनिवार्य

नियमावली के तहत राज्य में ट्रैकिंग कराने वाली हर एजेंसी और कंपनी को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए मान्य रहेगा। पहले से काम कर रही एजेंसियों को नियम लागू होने के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण ट्रैकिंग कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

गाइड्स की योग्यता और आयु सीमा तय

नई व्यवस्था में हाई और लो एल्टीट्यूड ट्रैकिंग गाइड्स की योग्यता और आयु सीमा भी निर्धारित की गई है। लो एल्टीट्यूड गाइड्स के लिए आयु सीमा 18 से 60 वर्ष तय की गई है, जबकि 50 वर्ष से अधिक आयु वालों को हर साल मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना होगा। मान्यता प्राप्त संस्थान से पर्वतारोहण कोर्स और अनुभव प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी भी ट्रैकिंग एजेंसी के स्टाफ में कम से कम 60 प्रतिशत कर्मचारी उत्तराखंड के स्थानीय निवासी होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।

ट्रैकर्स और कर्मचारियों का बीमा जरूरी

ट्रैकिंग पर जाने वाले प्रत्येक ट्रैकर का बीमा और मेडिकल सर्टिफिकेट एजेंसी के पास होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही टूर ऑपरेटर्स को अपने सभी कर्मचारियों का न्यूनतम पांच लाख रुपये का बीमा कराना होगा। मौसम की जानकारी पहले से लेना और खराब मौसम में ट्रैकिंग रोकना एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।

निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था

हर जिले में ट्रैकिंग गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना, पंजीकरण निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी।

उत्तराखंड में तैयार की जा रही यह पहली व्यापक ट्रैकिंग नियमावली साहसिक पर्यटन को नई दिशा देगी और राज्य को एक सुरक्षित व भरोसेमंद एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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