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हजार साल बाद भी अडिग सोमनाथ, पीएम मोदी के लेख में झलका भारत का आत्मविश्वास और सभ्यतागत चेतना

Even after a thousand years, Somnath stands unwavering; PM Modi's article reflects India's self-confidence and civilizational consciousness.

नई दिल्ली: सोमनाथ मंदिर पर पहले ऐतिहासिक आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावनात्मक और विचारप्रधान लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने सोमनाथ को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की उस जीवंत आत्मा का प्रतीक बताया है, जो बार-बार टूटने के बाद भी हर बार और अधिक मजबूती के साथ खड़ी हुई। प्रधानमंत्री ने लिखा कि ‘सोमनाथ’ का नाम सुनते ही गर्व, आत्मबल और अटूट आस्था की अनुभूति होती है।

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, सोमनाथ मंदिर भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है। सदियों तक हुए आक्रमण, लूट और विनाश के प्रयास भी इसकी आत्मा को नहीं मिटा सके। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सोमनाथ आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए स्वाभिमान और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री 11 जनवरी को गुजरात में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होंगे, जो 8 से 11 जनवरी तक चलेगा।

1026 का आक्रमण और भारत की जीवटता

अपने लेख में प्रधानमंत्री ने 1026 ईस्वी में हुए सोमनाथ मंदिर पर पहले बड़े आक्रमण का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि उस हमले को आज एक हजार वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन सोमनाथ की पहचान विनाश से नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और साहस से बनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता की शक्ति और धैर्य को समझने के लिए सोमनाथ से बेहतर उदाहरण शायद ही कोई हो।

उन्होंने इतिहासकार और स्वतंत्रता सेनानी केएम मुंशी की पुस्तक ‘सोमनाथ: द श्राइन इटरनल’ का हवाला देते हुए बताया कि महमूद गजनवी ने अक्टूबर 1025 में सोमनाथ की ओर कूच किया और जनवरी 1026 में मंदिर पर आक्रमण किया। उस समय हजारों रक्षकों ने मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

आजादी के बाद पुनर्निर्माण का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, जिसे केएम मुंशी ने आगे बढ़ाया। 1951 में मंदिर के उद्घाटन को लेकर मतभेद जरूर थे, लेकिन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपने निर्णय पर अडिग रहे और मंदिर भक्तों के लिए खोला गया। यह क्षण भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया।

बार-बार टूटा, फिर भी अमर रहा विश्वास

प्रधानमंत्री ने लिखा कि 13वीं से 18वीं सदी के बीच सोमनाथ पर कई हमले हुए। इसे मस्जिद में भी बदला गया, लेकिन आस्था कभी समाप्त नहीं हुई। रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा 18वीं सदी में कराए गए पुनर्निर्माण और स्वामी विवेकानंद की यात्रा का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे मंदिर इतिहास की जीवित स्मृति होते हैं।

भविष्य के भारत का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमलावर इतिहास के पन्नों में सिमट चुके हैं, जबकि सोमनाथ आज भी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है। यह मंदिर सिखाता है कि विनाश अस्थायी होता है, लेकिन विश्वास और सृजन की शक्ति हमेशा स्थायी रहती है। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि जैसे सोमनाथ अडिग रहा, वैसे ही भारत भी आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

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