उत्तराखंड

उत्तराखंड में प्रधानाचार्य भर्ती की राह साफ, नियमावली में हुआ बड़ा संशोधन

The way for recruitment of principals in Uttarakhand is clear, major amendment in the rules

देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से खाली चल रहे प्रधानाचार्य पदों को भरने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक (अध्यापन संवर्ग) राजपत्रित सेवा नियमावली-2022 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद अब इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

1180 पदों पर भर्ती की उम्मीद

राज्य में फिलहाल प्रधानाचार्य के कुल 1385 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 205 पर ही तैनाती है। यानी करीब 1180 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं, जिससे स्कूलों के संचालन में दिक्कतें आ रही थीं। अब नियमावली में संशोधन के बाद इन पदों पर सीधी भर्ती और सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से भर्तियां संभव हो सकेंगी।

तीन अहम नियमों में हुआ बदलाव

शिक्षा विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव के अनुसार नियमावली के तीन प्रमुख नियमों में बदलाव किया गया है।

  • नियम 5 (भर्ती का स्रोत): अब भर्ती का तरीका और प्रक्रिया स्पष्ट की गई है जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • नियम 6 (आयु सीमा): सीमित विभागीय परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा 50 से बढ़ाकर 55 वर्ष कर दी गई है।
  • नियम 8 (शैक्षिक और प्रशिक्षण योग्यता): अब कुछ विशेष परिस्थितियों में नॉन-बीएड प्रवक्ताओं को भी पात्र माना जाएगा।

कौन होंगे पात्र?

सीमित विभागीय परीक्षा में भाग लेने के लिए वे शिक्षक पात्र होंगे जिन्होंने –

  • प्रवक्ता पद पर 10 वर्ष या
  • प्रवक्ता और सहायक अध्यापक (एलटी) के रूप में कुल 15 वर्ष की सेवा की हो।
    साथ ही, वे शिक्षक जिन्होंने एलटी पद पर मौलिक रूप से नियुक्त होकर 15 वर्ष की संतोषजनक सेवा दी है, वे भी आवेदन कर सकेंगे।

शिक्षकों को मिला नया अवसर

सरकार के इस फैसले से राज्य के हज़ारों शिक्षकों को पदोन्नति और नेतृत्व का अवसर मिलेगा। इससे न केवल शिक्षकों में उत्साह बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य के स्कूलों में प्रशासनिक स्तर पर स्थायित्व आने की उम्मीद है।

उत्तराखंड सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानाचार्य पदों की भर्ती से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों के करियर विकास को भी बल मिलेगा।

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