उत्तराखंड पर बढ़ता कर्ज, मंत्रियों के यात्रा भत्ते में इजाफे ने खड़ा किया सियासी सवाल
Rising debt in Uttarakhand and an increase in ministers' travel allowances have raised political questions.
देहरादून: उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। राज्य सरकार द्वारा मंत्रियों के यात्रा भत्ते में की गई बढ़ोतरी ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। यह फैसला ऐसे वक्त पर लिया गया है, जब सरकार खुद प्रदेश पर बढ़ते कर्ज और सीमित संसाधनों की बात स्वीकार कर चुकी है। ऐसे में विपक्ष और आम जनता सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही है।
यात्रा भत्ते में बड़ा इजाफा
सरकारी आदेश के अनुसार अब मंत्रियों को प्रति माह यात्रा खर्च के रूप में पहले से कहीं अधिक राशि मिल सकेगी। पहले जहां यह सीमा 60 हजार रुपये थी, अब इसे बढ़ाकर 90 हजार रुपये कर दिया गया है। यानी हर मंत्री को हर महीने अतिरिक्त खर्च की सुविधा मिलेगी। सरकार का तर्क है कि मंत्रियों को जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों में लगातार दौरे करने पड़ते हैं, इसलिए भत्ते में संशोधन जरूरी था।
अधिसूचना के जरिए लागू हुआ फैसला
इस संबंध में जनवरी 2026 के अंत में अधिसूचना जारी की गई, जिसके बाद नियमों में संशोधन कर इसे लागू कर दिया गया। संशोधित नियमों के तहत मुख्यमंत्री से लेकर राज्य मंत्रियों तक, सभी को आधिकारिक दौरों के लिए तय सीमा तक यात्रा व्यय की अनुमति दी गई है।
पुराने फैसलों से जुड़ रही मौजूदा बहस
यह पहली बार नहीं है जब जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठे हों। बीते वर्षों में विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी, दायित्वधारियों के मानदेय और पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने जैसे फैसले पहले ही चर्चा में रह चुके हैं। ऐसे में नए फैसले ने जनता के बीच नाराजगी और बढ़ा दी है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर सरकार को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि जब राज्य पर भारी कर्ज है और विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई जा रही है, तब मंत्रियों के भत्ते बढ़ाना जनता के साथ अन्याय है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि पहले खर्चों पर नियंत्रण और व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है।
भाजपा का पक्ष
वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि महंगाई और कार्यभार को देखते हुए भत्तों में संशोधन सामान्य प्रक्रिया है। उनका यह भी कहना है कि मंत्रियों के कामकाज की नियमित समीक्षा की जाती है।
जनता के बीच उठते सवाल
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग आम लोगों के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या आर्थिक अनुशासन केवल जनता के लिए है। बढ़ते कर्ज और महंगाई के बीच जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं में इजाफा कई लोगों को असहज कर रहा है। मंत्रियों के यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी ने उत्तराखंड में सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह मुद्दा सियासत के साथ-साथ सार्वजनिक चर्चा का भी अहम विषय बना रह सकता है।



