Ram Rahim Parole: राम रहीम को फिर मिली पैरोल, 16वीं बार जेल से बाहर आने पर उठे सवाल
Ram Rahim Parole: Ram Rahim Granted Parole Again; Questions Raised as He Steps Out of Jail for the 16th Time.
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर पैरोल मिलने के बाद चर्चा में है। हरियाणा सरकार की ओर से उसे 30 दिनों की पैरोल मंजूर किए जाने के बाद मंगलवार को रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा कर दिया गया। यह पहली बार नहीं है, बल्कि वर्ष 2020 के बाद से अब तक 16वीं बार है जब राम रहीम को पैरोल या फरलो का लाभ मिला है।
जेल से बाहर निकलते ही उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना किया गया। इस दौरान पंजाब और हरियाणा पुलिस की विशेष सुरक्षा तैनात रही।
इस पूरे मामले को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर गंभीर अपराधों में सजा काट रहे दोषी को इतनी बार पैरोल कैसे मिल रही है।
Ram Rahim Parole को लेकर फिर गरमाई राजनीति
गुरमीत राम रहीम को मिली नई पैरोल के बाद हरियाणा सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनावी समीकरणों और वोट बैंक की राजनीति के कारण सरकार लगातार राम रहीम पर “मेहरबान” बनी हुई है।
विपक्ष का कहना है कि जब आम कैदियों को पैरोल पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तब एक दुष्कर्म और हत्या के दोषी को बार-बार राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पैरोल जेल नियमों और सुरक्षा आकलन के आधार पर दी गई है।
भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सिरसा रवाना
राम रहीम की रिहाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई। सुनारिया जेल से बाहर आते ही उसे पुलिस के मजबूत सुरक्षा घेरे में लिया गया।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि बड़ी संख्या में समर्थक एकत्र हो सकते हैं, इसलिए पूरे रूट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस काफिले के साथ राम रहीम को सीधे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय ले जाया गया।
प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी विशेष निगरानी रखी। कई संवेदनशील स्थानों पर पुलिस और खुफिया एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया।
2017 से जेल में बंद है गुरमीत राम रहीम
गुरमीत राम रहीम सिंह वर्ष 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। सीबीआई की विशेष अदालत ने उसे दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। इन मामलों के बाद देशभर में डेरा समर्थकों का हिंसक प्रदर्शन भी देखने को मिला था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। इन गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद लगातार पैरोल मिलने को लेकर न्यायिक और राजनीतिक बहस लगातार जारी है।
कितनी बार मिली राहत?
गुरमीत राम रहीम को पिछले कुछ वर्षों में लगातार पैरोल और फरलो मिलती रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से मई 2026 तक उसे कुल 16 बार जेल से अस्थायी राहत दी जा चुकी है।
राम रहीम को कब-कब मिली पैरोल या फरलो
- अक्टूबर 2020 – 1 दिन
- मई 2021 – 1 दिन
- फरवरी 2022 – 21 दिन
- जून 2022 – 30 दिन
- अक्टूबर 2022 – 40 दिन
- जनवरी 2023 – 40 दिन
- जुलाई 2023 – 30 दिन
- नवंबर 2023 – 21 दिन
- जनवरी 2024 – 60 दिन
- अगस्त 2024 – 21 दिन
- सितंबर 2024 – 21 दिन
- जनवरी 2025 – 30 दिन
- अप्रैल 2025 – 21 दिन
- अगस्त 2025 – 40 दिन
- जनवरी 2026 – 40 दिन
- मई 2026 – 30 दिन
लगातार मिल रही राहत को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने अदालतों में भी सवाल उठाए हैं।
डेरा समर्थकों में खुशी, विरोधियों में नाराजगी
जहां डेरा सच्चा सौदा से जुड़े समर्थकों में राम रहीम की रिहाई को लेकर उत्साह देखा गया, वहीं दूसरी ओर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने नाराजगी जताई है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार पैरोल मिलना पीड़ितों के मनोबल को कमजोर करता है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
चुनावी राज्यों में बढ़ जाती है चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी पंजाब, हरियाणा या आसपास के राज्यों में चुनावी माहौल बनता है, तब राम रहीम की पैरोल चर्चा का विषय बन जाती है। डेरा सच्चा सौदा का पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़ा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक दलों पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे डेरा समर्थकों को साधने की कोशिश करते हैं।हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, लेकिन हर बार पैरोल मिलने के बाद यह बहस फिर तेज हो जाती है।



