देहरादून में बारिश ने मचाया कहर, कारगी ग्रांट में जलभराव से दो दर्जन घर प्रभावित, दहशत में बीती रात
Rain wreaked havoc in Dehradun, two dozen houses affected by waterlogging in Kargi Grant, people were in panic last night
देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड में इस बार मानसून ने अपने भयावह स्वरूप से एक बार फिर सभी को चेतावनी दे दी है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जहां भूस्खलन और मलबा गिरने जैसी घटनाएं हो रही हैं, वहीं राजधानी देहरादून के शहरी और मैदानी इलाकों में बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सोमवार रात देहरादून के कारगी ग्रांट क्षेत्र में हुई कुछ घंटों की मूसलधार बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। जलभराव ने करीब दो दर्जन घरों को अपनी चपेट में ले लिया और लोगों को पूरी रात भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
तेज बारिश से नाले का उफान, घरों में घुसा पानी
सोमवार रात करीब 10 बजे शुरू हुई बारिश ने कुछ ही घंटों में कारगी ग्रांट मोहल्ले को जलसमूह में बदल दिया। कसाई मोहल्ले के पास बहने वाला नाला भारी वर्षा के कारण उफान पर आ गया और उस पर बनी पुलिया पानी में डूब गई। इस दौरान पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कॉलोनी के लगभग दो दर्जन मकानों में घुस गया। बिजली गुल हो गई, जिससे अंधेरे में लोग मोबाइल की रोशनी में रास्ता तलाशते रहे।
स्थानीय निवासी डॉ. मोहम्मद ने बताया कि नाले का जलस्तर तीन फीट ऊपर तक पहुंच गया था और यह स्थिति बेहद भयावह थी। घरों के अंदर पानी घुसने से बिस्तर, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान भीग गए। कई घरों में पानी बेडरूम तक पहुंच गया था, जिससे बच्चे और महिलाएं बुरी तरह घबरा गए थे।
पुरानी पुलिया और नालों की सफाई नहीं बन रही मुसीबत
इलाके के लोगों का कहना है कि कारगी ग्रांट में हर साल बारिश के समय यही स्थिति होती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा खराब थे। नालों की सफाई समय पर नहीं हुई और पुराने पुलियों की हालत बेहद खराब है। वहीं, मोहल्ले की सड़कों पर जल निकासी की व्यवस्था भी न के बराबर है, जिससे जलभराव और ज्यादा गहराता है।
स्थानीय निवासी इंतिजार हुसैन ने बताया कि हाल ही में पुलिया के नीचे सिविल पाइपलाइन डाली गई है, जिससे पुलिया की ऊंचाई और नाले की गहराई दोनों कम हो गई हैं। इससे पानी का प्रवाह बाधित होता है और बारिश के समय नाला ओवरफ्लो कर जाता है।
प्रशासन ने दी राहत, पर स्थायी समाधान जरूरी
प्रशासन की टीम मंगलवार सुबह प्रभावित क्षेत्र में पहुंची और जिन घरों में पानी घुसा था, वहां ₹2500 की राहत राशि के चेक वितरित किए गए। हालांकि, स्थानीय लोग इस राहत को अस्थायी मानते हैं और मांग कर रहे हैं कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
मोहम्मद यूसुफ नामक व्यक्ति ने कहा कि नाले के भीतर पाइपलाइन का निर्माण बिना किसी वैज्ञानिक योजना के किया गया है, जिससे जलनिकासी प्रणाली पूरी तरह असंतुलित हो गई है। बारिश के समय यही छोटी-छोटी गलतियां भारी मुसीबत बन जाती हैं।
बड़ी दुर्घटना टली, लेकिन खतरा बना रहा
डॉ. मोहम्मद ने बताया कि नाले के किनारे एक बिजली का ट्रांसफॉर्मर है और सोमवार रात पानी ट्रांसफॉर्मर के बिल्कुल नीचे तक पहुंच गया था। यदि कुछ और देर बारिश होती तो ट्रांसफॉर्मर में करंट फैल सकता था, जिससे जानमाल की बड़ी हानि हो सकती थी। यह बात दर्शाती है कि यह सिर्फ एक जलभराव की घटना नहीं थी, बल्कि एक संभावित दुर्घटना भी टल गई।
महिलाएं और बच्चे हुए सबसे ज्यादा प्रभावित
स्थानीय महिला यास्मीन ने बताया कि रात 12 बजे के बाद उनके घर में भी पानी भरने लगा। पानी बेड के नीचे तक पहुंच गया और बच्चे डर के मारे रोने लगे। चारों ओर पानी भर जाने के कारण घर से बाहर निकलना संभव नहीं था। यहां तक कि छत की ओर भी रास्ता बंद हो गया था।
जरूरत स्थायी समाधान की, न कि तात्कालिक राहत की
देहरादून स्मार्ट सिटी के दावे करता है, लेकिन ऐसी घटनाएं इन दावों की हकीकत उजागर कर देती हैं। जब तक नालों की सफाई, मजबूत पुलियों का निर्माण और जलनिकासी की प्रभावी योजना नहीं बनाई जाती, तब तक ऐसी आपदाएं आती रहेंगी। प्रशासन को चाहिए कि तात्कालिक राहत से आगे बढ़ते हुए दीर्घकालिक समाधान की ओर कदम बढ़ाए।

