उत्तराखंड

उत्तराखंड चुनाव से पहले तेज हुई सियासत, मध्य हिमालय क्षेत्र की 24 सीटों पर कांग्रेस की खास नजर

Politics heats up ahead of Uttarakhand elections, Congress eyes 24 seats in the central Himalayan region

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होती नजर आ रही हैं। चुनाव भले ही अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने राज्य के मध्य हिमालय क्षेत्र को अपने चुनावी फोकस में रखने के संकेत दिए हैं। पार्टी का मानना है कि इन पर्वतीय जिलों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देकर आने वाले चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उत्तराखंड की राजनीति में पर्वतीय क्षेत्रों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से कांग्रेस अब उन जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है जो गैरसैंण के आसपास स्थित हैं और जहां स्थायी राजधानी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।

छह जिलों की 24 सीटों पर रणनीतिक फोकस

कांग्रेस की रणनीति में मध्य हिमालय क्षेत्र के छह जिले अहम माने जा रहे हैं। इनमें अल्मोड़ा, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली और रुद्रप्रयाग शामिल हैं। इन जिलों में कुल 24 विधानसभा सीटें आती हैं, जिन्हें चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अल्मोड़ा जिले में छह विधानसभा सीटें अल्मोड़ा, द्वाराहाट, जागेश्वर, रानीखेत, सल्ट और सोमेश्वर शामिल हैं। बागेश्वर जिले में दो सीटें बागेश्वर और कपकोट आती हैं। वहीं पौड़ी गढ़वाल जिले में पांच विधानसभा सीटें कोटद्वार, पौड़ी, चौबट्टाखाल, श्रीनगर और यमकेश्वर हैं।

इसके अलावा टिहरी गढ़वाल जिले में छह सीटें टिहरी, प्रतापनगर, देवप्रयाग, धनोल्टी, नरेंद्रनगर और घनसाली आती हैं। चमोली जिले में बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जबकि रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ और रुद्रप्रयाग सीटें आती हैं। इन सभी सीटों को मिलाकर कुल 24 विधानसभा सीटें बनती हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

2022 चुनाव में कमजोर रहा था प्रदर्शन

विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस को इन पर्वतीय क्षेत्रों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी। 24 सीटों में से पार्टी केवल चार सीटें ही जीत सकी थी। इनमें अल्मोड़ा जिले की अल्मोड़ा और द्वाराहाट सीट, टिहरी जिले की प्रतापनगर सीट और चमोली जिले की बदरीनाथ सीट शामिल थीं। अधिकांश सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी।

इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अब इन क्षेत्रों में अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही है। पार्टी का मानना है कि स्थानीय समस्याओं और क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता से बेहतर संवाद स्थापित किया जा सकता है।

गैरसैंण स्थायी राजधानी का मुद्दा फिर चर्चा में

कांग्रेस लंबे समय से गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग करती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य के पर्वतीय जिलों के संतुलित विकास के लिए यह कदम जरूरी है। उनका तर्क है कि यदि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाता है तो मध्य हिमालय क्षेत्र के जिलों में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ेंगी और विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना

दूसरी ओर भाजपा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि गैरसैंण को लेकर कांग्रेस केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, जबकि इस दिशा में ठोस कदम भाजपा सरकार के दौरान उठाए गए थे। भाजपा का दावा है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का निर्णय भाजपा सरकार में ही लिया गया था।

चुनाव से पहले फिर गरमाएंगे पहाड़ के मुद्दे

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर पर्वतीय जिलों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस जहां मध्य हिमालय क्षेत्र की सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं भाजपा भी इन मुद्दों को लेकर अपने तर्क पेश कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पहाड़ के मुद्दे राज्य की चुनावी राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

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