उत्तराखंड

देहरादून में शुरू होने जा रहा ऐतिहासिक झंडे जी मेला, 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड का होगा आरोहण

The historic Jhanda Ji fair is going to start in Dehradun, where a new 94-feet long flagpole will be hoisted.

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आस्था, परंपरा और इतिहास से जुड़ा प्रसिद्ध झंडे जी मेला एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी दरबार साहिब में झंडे जी के आरोहण के साथ इस ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ होगा। इस बार मेले की सबसे खास बात 94 फीट लंबे नए ध्वजदंड का आरोहण है, जिसकी तैयारियां पिछले कई महीनों से की जा रही थीं।

झंडे जी मेले को लेकर दरबार साहिब और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं का देहरादून पहुंचना शुरू हो चुका है। बड़ी संख्या में आने वाली संगतों को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

दरबार साहिब में तैयारियां अंतिम चरण में

दरबार साहिब में मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। प्रबंधन समिति की ओर से कई दिनों से आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही थीं। हर साल की तरह इस बार भी झंडे जी के आरोहण के साथ ही मेले की आधिकारिक शुरुआत होगी।

यह आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देहरादून की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु हर साल इस आयोजन में शामिल होने के लिए यहां पहुंचते हैं।

पारंपरिक तरीके से दरबार साहिब लाया गया नया ध्वजदंड

झंडे जी के लिए तैयार किया गया नया ध्वजदंड हाल ही में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दरबार साहिब लाया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं की पुष्प वर्षा के बीच ध्वजदंड का स्वागत किया गया। इस धार्मिक जुलूस को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

कारीगरों ने इस ध्वजदंड को तैयार करने में लगभग दो महीने का समय लगाया है। यह ध्वजदंड झंडे जी मेले की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक माना जाता है।

गिलाफ चढ़ाने की विशेष परंपरा

झंडे जी मेले की एक खास परंपरा गिलाफ चढ़ाने की भी है। इसके लिए कई सप्ताह पहले से सेवादारों द्वारा गिलाफ सिलने का काम शुरू कर दिया जाता है। इस सेवा में बड़ी संख्या में महिलाएं भी भाग लेती हैं और श्रद्धा के साथ गिलाफ तैयार करती हैं।

परंपरा के अनुसार झंडे जी पर सबसे पहले 41 सादे गिलाफ चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद 21 सनील के गिलाफ लगाए जाते हैं। अंत में सबसे ऊपर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है, जिसे चढ़ाने का अवसर बेहद विशेष माना जाता है। कई श्रद्धालु वर्षों पहले से इसके लिए अपना नाम दर्ज कराते हैं।

होली के बाद पंचमी को होता है आरोहण

झंडे जी का आरोहण हर साल होली के बाद पंचमी तिथि को किया जाता है। इस दिन शाम के समय धार्मिक अनुष्ठानों के साथ झंडे जी पर गिलाफ चढ़ाए जाते हैं और फिर पूरे विधि-विधान के साथ ध्वजदंड का आरोहण किया जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु दरबार साहिब पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मेले में दिखती है खास रौनक

झंडे जी के आरोहण के साथ ही मेले की रौनक पूरे क्षेत्र में दिखाई देने लगती है। दरबार साहिब के आसपास लगभग 200 से अधिक दुकानें सजती हैं, जहां श्रद्धालु धार्मिक वस्तुओं के साथ-साथ अन्य सामान भी खरीदते हैं।

यह मेला धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का भी रूप ले लेता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी पूरे उत्साह से भाग लेते हैं।

सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। दरबार साहिब के आसपास के क्षेत्र को जीरो जोन घोषित किया गया है और कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है।

भीड़ प्रबंधन के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई है। मेले के दौरान 24 घंटे लंगर की व्यवस्था भी रहेगी, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

झंडे जी मेला आस्था, सेवा और सामुदायिक एकता की ऐसी परंपरा है, जो हर साल देहरादून की सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करती है।

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