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प्रधानमंत्री मोदी ने NCC रैली में युवाओं से की ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बहस की अपील

PM Modi appeals to youth to debate on 'one country, one election' in NCC rally

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के करिअप्पा परेड मैदान में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की वार्षिक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से ‘एक देश, एक चुनाव’ पर चल रही बहस को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विषय उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है और उन्हें इस बहस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद कई वर्षों तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन फिर यह व्यवस्था टूट गई। उन्होंने कहा, “इसका देश को बहुत नुकसान हुआ। बार-बार चुनाव होने से मतदाता सूची को अपडेट करने, चुनावी कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने और चुनावी प्रक्रिया के दौरान पढ़ाई में व्यवधान डालने जैसी समस्याएं आईं।” उन्होंने बताया कि बार-बार चुनाव होने से शासन व्यवस्था पर भी दबाव पड़ता है और विकास कार्यों में रुकावट आती है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “इसलिए देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बहस चल रही है और लोग इसके फायदे और नुकसान पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। मैं भारत के युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे इस बहस को बढ़ाएं और इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह विषय उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।”

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने युवाओं को प्रेरित किया और कहा, “भारत में पिछले 10 वर्षों में अनावश्यक बाधाओं को हटाकर युवाओं का सामर्थ्य बढ़ाया गया है। इससे ना केवल युवाओं की स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि पूरे देश की ताकत भी बढ़ी है।”

इस वर्ष की एनसीसी रैली का विषय ‘युवा शक्ति, विकसित भारत’ था, जिसमें 2,361 कैडेटों ने भाग लिया, जिनमें 917 बालिका कैडेट भी शामिल थीं। यह बालिका कैडेटों की सर्वाधिक भागीदारी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत के युवा न केवल भारत के विकास, बल्कि दुनिया के विकास को भी निर्धारित करेंगे।

उन्होंने कहा, “भारत के युवा सिर्फ अपने देश के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक भलाई के लिए भी काम कर रहे हैं। दुनिया आज इस बात को मान रही है।” इस अवसर पर 800 से अधिक NCC कैडेट्स ने राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी वचनबद्धता को दर्शाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री मोदी के इस संबोधन ने युवाओं को न केवल ‘एक देश, एक चुनाव’ की बहस में शामिल होने की प्रेरणा दी, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान की अहमियत भी समझाई।

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