उत्तराखंड

Pahalgam Terror Attack Book: ‘जब समय थम गया…’ Pahalgam Attack Book ने फिर ताजा किए जख्म, CM धामी को भेंट की गई खास पुस्तक

Pahalgam Terror Attack Book: 'When Time Stood Still...'Book on Pahalgam Attack Reopens Old Wounds; Special Volume Presented to CM Dhami.

Uttarakhand में एक भावुक और महत्वपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला, जब Pahalgam Attack Book ‘पहलगाम … जब समय थम गया’ को औपचारिक रूप से जनता के सामने लाया गया। इस पुस्तक के लेखक के एस चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें अपनी पुस्तक की प्रति भेंट की। यह Pahalgam Attack Book न केवल एक घटना का दस्तावेज है, बल्कि एक प्रत्यक्षदर्शी के व्यक्तिगत अनुभवों का जीवंत चित्रण भी है।

पहलगाम में मौजूद रहे लेखक, अनुभवों को दी किताब की शक्ल

Pahalgam Attack Book की खास बात यह है कि इसके लेखक के एस चौहान उस दर्दनाक दिन पर अपने परिवार के साथ Pahalgam में मौजूद थे। उन्होंने उस भयावह घटना को करीब से देखा और महसूस किया। यही वजह है कि Pahalgam Attack Book में घटनाओं का वर्णन बेहद संवेदनशील और वास्तविक है। पुस्तक में उस दिन के माहौल, लोगों के डर, अफरा-तफरी और अचानक बदलते हालात को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

जब Pahalgam Attack Book की कहानी सच बनी

Pahalgam Attack Book जिस घटना पर आधारित है, वह 22 अप्रैल 2025 का दिन था, जब पहलगाम में पर्यटकों पर एक बर्बर आतंकी हमला हुआ। इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मारे गए लोगों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू चालक शामिल था, जिसने बहादुरी दिखाते हुए पर्यटकों को बचाने की कोशिश की।

हमले के पीछे आतंकी संगठन की भूमिका

Pahalgam Attack Book में इस हमले की पृष्ठभूमि को भी समझाया गया है। यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ नामक संगठन ने अंजाम दिया था, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ माना जाता है। Pahalgam Attack Book में यह भी बताया गया है कि कैसे इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

Pahalgam Attack Book में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र

इस Pahalgam Attack Book में केवल घटना का वर्णन ही नहीं, बल्कि उसके बाद की घटनाओं को भी शामिल किया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 6 और 7 मई को शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस सैन्य कार्रवाई में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया गया।

ऑपरेशन महादेव: हमले का जवाब

Pahalgam Attack Book में यह भी बताया गया है कि जुलाई 2025 में ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत सुरक्षा बलों ने इस हमले में शामिल आतंकवादियों को मार गिराया। इस कार्रवाई में भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की अहम भूमिका रही। यह ऑपरेशन देश के लिए एक बड़ा जवाब था, जिसने यह संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति सख्त और स्पष्ट है।

भावनात्मक दस्तावेज बनी Pahalgam Attack Book

Pahalgam Attack Book केवल एक घटना का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की पीड़ा और साहस की कहानी भी है, जिन्होंने उस दिन को झेला। लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए उस भयावह माहौल को शब्दों में पिरोया है, जिससे पाठक उस घटना को महसूस कर सके।

मुख्यमंत्री ने की सराहना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Pahalgam Attack Book को एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया और कहा कि इस तरह की किताबें समाज को जागरूक करने और इतिहास को सहेजने में मदद करती हैं। उन्होंने लेखक के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सीख का काम करेगी।

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