देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा सत्र के चौथे दिन राज्य में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था संशोधन विधेयक 2025 को पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में इस विधेयक को प्रस्तुत किया, जिसे विपक्ष की चर्चा की मांग के बावजूद पास कर दिया गया।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
- सरकार भू-माफियाओं से उत्तराखंड की जमीन बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
- राज्य में मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कानून बनाया गया है।
- बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई बंजर पड़ी जमीनों पर भी यह कानून असर डालेगा।
- भूमि खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि अवैध लेनदेन रोका जा सके।
- इकोनॉमी और ईकोलॉजी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
भू कानून के प्रमुख प्रावधान
- साढ़े 12 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- पहाड़ों में चकबंदी और बंदोबस्ती को तेजी से लागू किया जाएगा।
- दूसरे राज्यों के लोगों के लिए भूमि खरीदना कठिन होगा, अब डीएम सीधे अनुमति नहीं दे पाएंगे।
- प्रदेश में जमीन खरीद के लिए एक पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसमें बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई जमीन का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा।
- निकाय सीमा में तय भू उपयोग से अलग उपयोग करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- राजस्व परिषद को हर जिले के डीएम से नियमित रूप से भूमि खरीद की रिपोर्ट लेनी होगी।
- भूमि की कीमतों में अनियमित वृद्धि पर नियंत्रण रहेगा, जिससे मूल निवासियों को जमीन खरीदने में सहूलियत होगी।
- अनियमितताओं पर सरकार को भूमि खरीद-बिक्री पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और अवैध कब्जों को हटाया जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस कानून को प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग की और कहा कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राजस्व विशेषज्ञों से इस पर चर्चा की जानी चाहिए और राज्य में जमीनों की खरीद-फरोख्त को नियंत्रित करने के लिए अधिक ठोस प्रावधानों की जरूरत है।
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि भू-माफिया की स्पष्ट परिभाषा तय की जानी चाहिए ताकि उचित कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि बैकडोर से जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में लागू किया गया यह नया भू कानून राज्य की भूमि को अवैध कब्जों और बाहरी खरीद से बचाने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, विपक्ष की आपत्तियों और इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए आने वाले समय में इसमें और भी संशोधन किए जा सकते हैं।

