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उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई ज़मीन का हुआ खुलासा, 140 लोगों को जारी हुए नोटिस

Land purchased by outsiders exposed in Uttarakhand, notices issued to 140 people

देहरादून: उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा राज्य में खरीदी गई ज़मीन के मामले में शासन ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारियों ने बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई ज़मीन की पूरी जानकारी शासन को भेज दी है, और कई जिलों में भू कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं। खासकर उन व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं जिन्होंने ज़मीन खरीदने के उद्देश्य में बदलाव किया या जिनके पास निर्धारित सीमा से अधिक ज़मीन है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए थे, और अब तक दो जिलों से रिपोर्ट शासन को प्राप्त हो चुकी है। बाकी 11 जिलों के जिलाधिकारियों ने पहले ही यह रिपोर्ट भेज दी थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और बाहरी लोगों द्वारा ज़मीन खरीदने के मामलों में सख्त जांच के आदेश दिए थे।

भू कानून का उल्लंघन करने वाले 140 लोगों पर कार्रवाई की तैयारी

 

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 140 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं जिनके द्वारा भू कानून का उल्लंघन किया गया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्होंने ज़मीन सरकार से किसी विशेष प्रयोजन के लिए खरीदी थी, लेकिन उस ज़मीन पर अन्य गतिविधियां शुरू कर दीं। शासन अब इन रिकॉर्ड्स का गहराई से आकलन कर रहा है, और उम्मीद की जा रही है कि उल्लंघन करने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

उत्तराखंड के भू कानून के तहत, केवल राज्य के निवासियों को 250 वर्ग मीटर तक ज़मीन खरीदने की अनुमति है, जबकि बाहरी राज्य के निवासियों के लिए यह सीमा लागू होती है। ऐसे मामलों में शासन का उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और भूमि के सदुपयोग को सुनिश्चित करना है।

आगे की जांच

 

शासन अब इन सभी भूमि रिकार्ड्स की बारीकी से जांच कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई बड़ा उल्लंघन तो नहीं हुआ है। ज़मीन खरीदने के उद्देश्य में कोई बदलाव, गलत प्रयोजन के लिए ज़मीन का इस्तेमाल या निर्धारित सीमा से अधिक ज़मीन खरीदने के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया अभी जारी है और इसके बाद कई और मामले सामने आ सकते हैं। इस अभियान से यह साफ हो गया है कि शासन ने भू कानून के उल्लंघन को लेकर कोई भी नरमी बरतने का इरादा नहीं किया है, और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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