उत्तराखंड

Khait Mountain Mystery: बबीता पांडे की गुमशुदगी के बाद फिर चर्चा में आया ‘परियों का देश’, नौ परियों की लोककथा ने बढ़ाई उत्सुकता

Khait Mountain Mystery: 'Land of Fairies' back in the spotlight following Babita Pandey's disappearance; folklore about nine fairies fuels curiosity.

Khait Mountain Mystery एक बार फिर उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है। दयारा बुग्याल ट्रेक से 26 दिनों से लापता रामनगर, नैनीताल निवासी बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने के बाद टिहरी गढ़वाल के खैट पर्वत और उससे जुड़ी लोककथाओं को लेकर लोगों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि पुलिस और बचाव एजेंसियां इस मामले को पूरी तरह व्यावहारिक दृष्टिकोण से देख रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर परियों की कहानियां और सदियों पुरानी मान्यताएं फिर से लोगों की जुबान पर हैं।

Khait Mountain Mystery ने फिर जगाई लोककथाओं की याद

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के जाखणीधार ब्लॉक में स्थित खैट पर्वत को स्थानीय लोग ‘परियों का देश’ के नाम से जानते हैं। करीब दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गुंबदाकार पर्वत प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ रहस्यमयी कहानियों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने वाले ट्रेक मार्ग पर जिला पंचायत द्वारा “खैट पर्वत – परियों का देश” का बोर्ड भी लगाया गया है।

बबीता पांडे की गुमशुदगी के बाद Khait Mountain Mystery एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि दोनों घटनाओं का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन स्थानीय समाज में पुरानी मान्यताओं और लोकविश्वासों का जिक्र होने लगा है।

नौ परियों की कहानी, जिन्हें माना जाता है वन देवी

स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार खैट पर्वत पर नौ परियां निवास करती हैं, जिन्हें क्षेत्र की रक्षक वन देवियां माना जाता है। कहा जाता है कि ये सभी परियां आपस में बहनें हैं और प्रकृति की संरक्षक के रूप में पूजी जाती हैं।

मान्यता है कि इन परियों को तेज शोर, चमकीले कपड़े और प्रकृति के नियमों का उल्लंघन पसंद नहीं है। लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि जो लोग इन मान्यताओं की अवहेलना करते हैं, उन्हें परियां अपने प्रभाव में लेकर परीलोक तक पहुंचा देती हैं। हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन पहाड़ों में आज भी इन कहानियों को श्रद्धा और विश्वास के साथ सुना जाता है।

राजा आशा रावत और नौ बेटियों की लोककथा

Khait Mountain Mystery से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राजा आशा रावत की है। कहा जाता है कि राजा आशा रावत की कई शादियां हुईं, लेकिन उन्हें संतान सुख नहीं मिला। बाद में उनका विवाह देवा नामक युवती से हुआ, जिसके बाद नौ बेटियों का जन्म हुआ।

इन नौ बेटियों में बचपन से ही असाधारण शक्तियां दिखाई देती थीं। जैसे-जैसे वे बड़ी हुईं, उनका लगाव पर्वतों और प्रकृति की ओर बढ़ता गया। एक दिन वे ऊंचे पहाड़ों की ओर चली गईं और वहीं दिव्य शक्तियों से युक्त परियों में परिवर्तित हो गईं।

इन परियों के नाम आशा रौतेली, बासा रौतेली, इंगला रौतेली, गर्दवा रौतेली, सते रौतेली, बरदेई रौतेली, कमला रौतेली, देवा रौतेली और बगुला रौतेली बताए जाते हैं।

आछरी-मांतरी के रूप में होती है पूजा

स्थानीय ग्रामीण वीर सिंह और बलबीर सिंह बताते हैं कि गढ़वाली भाषा में इन परियों को “आछरी-मांतरी” कहा जाता है। उनके सम्मान में हर वर्ष मेले का आयोजन भी किया जाता है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल कहानी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

आज भी खैट पर्वत क्षेत्र में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और लोककथाओं का अद्भुत संगम इस स्थान को खास बनाता है।

जीतू बगड़वाल और कचड़ू राणा की कथाएं भी फिर चर्चा में

बबीता पांडे के मामले के बाद केवल Khait Mountain Mystery ही नहीं, बल्कि उत्तरकाशी और टिहरी क्षेत्र की अन्य प्रसिद्ध लोककथाएं भी चर्चा में आ गई हैं।

करीब 150 वर्ष पहले ऐरासुगढ़ के जागीरदार कचड़ू राणा की कहानी आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। कहा जाता है कि अपनी बहन को ससुराल से लाते समय जंगल में परियां उन्हें अपने प्रभाव में ले गई थीं। बाद में वे रात में अपनी बूढ़ी मां की मदद करने आते थे, लेकिन मां द्वारा देख लिए जाने के बाद हमेशा के लिए अदृश्य हो गए। आज कई स्थानों पर कचड़ू राणा को देवता के रूप में पूजा जाता है।

इसी तरह प्रसिद्ध लोकनायक जीतू बगड़वाल की कथा में भी बताया जाता है कि उनकी बांसुरी की मधुर धुन से प्रभावित होकर परियां उन्हें अपने साथ ले गई थीं।

क्या कहती है आधुनिक सोच?

संवेदना समूह के अध्यक्ष जेपी राणा का कहना है कि लोककथाएं उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कोई इन पर विश्वास करे या न करे, लेकिन पीढ़ियों से ये कहानियां सुनाई जाती रही हैं और आज भी लोगों के बीच जीवित हैं।

दूसरी ओर प्रशासन और विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, अचानक बदलता मौसम, गहरी खाइयां, घना कोहरा और सीमित मोबाइल नेटवर्क जैसी चुनौतियां किसी भी व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।

बबीता पांडे की तलाश अब भी जारी

रामनगर निवासी बबीता पांडे के लापता होने के 26 दिन बाद भी पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय टीमें लगातार खोज अभियान चला रही हैं। खराब मौसम और दुर्गम क्षेत्र के बावजूद तलाश जारी है। परिवार को अब भी उम्मीद है कि कोई सकारात्मक खबर सामने आएगी।

इधर, बबीता पांडे की गुमशुदगी के साथ ही Khait Mountain Mystery और उससे जुड़ी सदियों पुरानी लोककथाएं एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। जहां विज्ञान और प्रशासन इस घटना की व्यावहारिक जांच में जुटे हैं, वहीं पहाड़ों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कहानियां लोगों की जिज्ञासा और भावनाओं को लगातार प्रभावित कर रही हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button