श्री केदारनाथ धाम के कपाट विधिवत बंद, मुख्यमंत्री धामी ने श्रद्धालुओं को दी शीतकालीन यात्रा की शुभकामनाएं
The doors of Shri Kedarnath Dham were formally closed, CM Dhami wished the devotees a happy winter pilgrimage.
केदारनाथ, उत्तराखंड: भैया दूज के पावन अवसर पर आज प्रातः 8 बजकर 30 मिनट पर विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए गए। इस पवित्र अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धाम में उपस्थित रहे और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। मंदिर परिसर को पारंपरिक पुष्पों से भव्य रूप में सजाया गया था, जबकि सेना के बैंड की भक्ति धुनों और श्रद्धालुओं के जयघोष ने पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया।
समाधि पूजा और कपाट बंद करने की प्रक्रिया
कपाट बंद करने की प्रक्रिया ब्रह्ममुहूर्त में प्रारंभ हुई। मुख्य पुजारी बागेशलिंग और आचार्यगणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ, हवन और समाधि पूजन संपन्न कराया। इसके बाद भगवान केदारनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को ब्रह्मकमल, कुमजा, बुकला और सूखे फूलों से ढककर समाधि रूप दिया गया। पूजा पूर्ण होने के उपरांत गर्भगृह के द्वार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति में मंदिर के पूर्वी और दक्षिणी द्वारों को भी विधिवत रूप से बंद किया गया। तत्पश्चात भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली को मंदिर की परिक्रमा कर जयघोष के बीच प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए रवाना किया गया।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारपुरी का पुनर्निर्माण अभूतपूर्व रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
धामी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे शीतकालीन यात्रा के दौरान गद्दी स्थलों में भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका, होमस्टे व्यवसाय और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यात्रा व्यवस्था में सहयोग देने वाले सभी विभागों, सुरक्षा बलों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया।
इस वर्ष की यात्रा के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 17,68,795 श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए, जो वर्ष 2024 की तुलना में लगभग सवा लाख अधिक है। यात्रा के दौरान मौसम में आए बदलावों को छोड़कर संपूर्ण व्यवस्था सुचारु रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था मजबूत रखी जाएगी।
पंचमुखी डोली की यात्रा
कपाट बंद होने के बाद पंचमुखी डोली रामपुर में रात्रि विश्राम करेगी। शुक्रवार को यह गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी और फिर शनिवार को ऊखीमठ के श्री ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी, जहां शीतकालीन पूजन संपन्न होगा। स्थानीय लोगों के लिए यह यात्रा आस्था और पर्यटन दोनों दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।
समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर विधायक आशा नौटियाल, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, कृषि विपणन बोर्ड अध्यक्ष अनिल डब्बू, जिलाधिकारी प्रतीक जैन और पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
आस्था और परंपरा का संगम
कपाट बंद होने का यह समारोह उत्तराखंड की धार्मिक परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि वे शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनें और स्थानीय धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करें, जिससे “आस्था के साथ आजीविका” का संदेश पूरे प्रदेश में प्रसारित हो।



