पहली बार तैयार हो रहा वृहद मॉनिटरिंग सिस्टम
उत्तराखंड में अब वनाग्नि से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का विस्तृत लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। इसके लिए राज्य में पहली बार वृहद स्तर पर मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिलों में वनाग्नि पर नजर रखने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग उपकरण लगाने की योजना बनाई है, जिससे जंगलों में आग के कारण होने वाले प्रदूषण का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड बनेगा पहला राज्य
अब तक हिमालयी राज्यों में वनाग्नि से हुए पर्यावरणीय नुकसान का कोई समग्र रिकॉर्ड नहीं था। कुछ स्थानों पर सीमित अध्ययन जरूर हुए, लेकिन राज्यव्यापी आंकड़े मौजूद नहीं थे। उत्तराखंड इस दिशा में पहल करते हुए हिमालयी राज्यों में पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां हर जिले में मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों की मदद से यह सिस्टम तैयार किया जाएगा।
ब्लैक कार्बन बढ़ने से बढ़ी चिंता
साल 2024 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, वनाग्नि के दौरान ब्लैक कार्बन की मात्रा सामान्य से 70-80% तक अधिक पाई गई थी। थराली के डूंगरी क्षेत्र में सामान्य दिनों में जहां 1.5 माइक्रोग्राम/मीटर³ कार्बन रिकॉर्ड होता था, वहीं आग के समय यह 13-14 माइक्रोग्राम/मीटर³ तक पहुंच गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 5 माइक्रोग्राम/मीटर³ से अधिक स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।
इस साल वनाग्नि के मामलों में दिखी राहत
साल 2025 में उत्तराखंड में वनाग्नि के मामले पहले की तुलना में कम रहे हैं। अब तक केवल 75 घटनाएं दर्ज हुई हैं, जबकि 2024 में इसी समय तक 536 घटनाएं हो चुकी थीं। 66.52 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। इससे संकेत मिलता है कि बचाव के प्रयास प्रभावी हो रहे हैं।
भविष्य की रणनीति तय करने में मददगार होगी यह पहल
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़े आने के बाद वन विभाग भी अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा। इससे न केवल पर्यावरणीय क्षति का आकलन होगा, बल्कि भविष्य में बेहतर रणनीति बनाकर जंगलों को आग से बचाया जा सकेगा। यह पहल प्रदेश के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।



