Gairsain Smart City Project: गैरसैंण बनेगा उत्तराखंड का पहला ‘पहाड़ी स्मार्ट सिटी’, 25,000 करोड़ का खाका और बदरी गाय सेंटर से बदलेगी तस्वीर
Gairsain Smart City Project: Gairsain will become Uttarakhand's first 'hill smart city', with a 25,000 crore blueprint and the Badri Cow Centre set to change the landscape.
उत्तराखंड की भावनाओं के केंद्र और ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के लिए एक नई सुबह की आहट सुनाई दे रही है। लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहे इस पर्वतीय क्षेत्र को अब ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। Gairsain Smart City Project के माध्यम से सरकार न केवल जनभावनाओं को सम्मान देने की कोशिश कर रही है, बल्कि गैरसैंण को आधुनिक सुविधाओं से लैस एक आदर्श पहाड़ी शहर बनाने का संकल्प भी दोहरा रही है।
यह केवल एक ढांचागत विकास नहीं, बल्कि उन अधूरे वादों को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पिछले कई वर्षों से सरकारी फाइलों में कैद थे।
स्मार्ट सिटी से नए स्वरूप में निखरेगी ग्रीष्मकालीन राजधानी
समुद्र तल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण अब आधुनिक तकनीक और पहाड़ी संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में विकसित होगा। Gairsain Smart City Project के तहत गैरसैंण मुख्य बाजार से लेकर भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर तक के पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया जाएगा। इसमें वाई-फाई कनेक्टिविटी, स्मार्ट लाइटिंग, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
सरकार का उद्देश्य गैरसैंण को एक ऐसा “मिनी सचिवालय” और प्रशासनिक केंद्र बनाना है, जहाँ ग्रीष्मकाल में राजधानी का संचालन सुगमता से हो सके। इसके लिए गैरसैंण विकास परिषद के बजट में भी भारी बढ़ोतरी की गई है।
राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR): 45 किमी के दायरे में फैलेगा विकास
Gairsain Smart City Project का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘राज्य राजधानी क्षेत्र’ (State Capital Region – SCR) का निर्माण है। पूर्व में की गई घोषणा के अनुसार, गैरसैंण के चारों ओर 45 किलोमीटर की परिधि को विकसित किया जाएगा। इसमें तीन जिलों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा:
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चमोली जिला: कर्णप्रयाग और थराली।
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अल्मोड़ा जिला: चौखुटिया और द्वाराहाट।
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पौड़ी जिला: थलीसैंण।
इस वृहद योजना पर लगभग 25,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस क्षेत्र के विकसित होने से न केवल मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
बदरी गाय एक्सीलेंस सेंटर से दूर होगी ‘वीरानी’
अक्सर यह देखा गया है कि भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र खत्म होते ही वहां वीरानी छा जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार भराड़ीसैंण में ‘बदरी गाय एक्सीलेंस सेंटर’ (Excellence Center for Badri Cow) स्थापित करने जा रही है। Gairsain Smart City Project का यह हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था और पशुपालन को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा। इससे यहाँ सालभर चहल-पहल बनी रहेगी और राज्य की विशिष्ट नस्ल का संरक्षण भी होगा।
अधूरे वादों की कसौटी पर नई उम्मीद
गैरसैंण का इतिहास घोषणाओं से भरा रहा है। 4 मार्च 2020 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था, तब लोगों की उम्मीदें सातवें आसमान पर थीं। हालांकि, नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद में अपग्रेड करने और एससीआर का मसौदा लागू करने में हुई देरी ने स्थानीय निवासियों में थोड़ी निराशा पैदा की थी।
अब, चुनावी साल की आहट के बीच Gairsain Smart City Project का ऐलान गैरसैंण के निवासियों के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है। लोगों को अपेक्षा है कि इस बार स्मार्ट सिटी का यह ख्वाब कागजों से निकलकर धरातल पर उतरेगा।
सियासत से हटकर जनभावनाओं का सम्मान
9 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड बना, तब गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठी थी। राजनीतिक दलों ने इसे चुनावी मुद्दा तो बनाया, लेकिन पूर्ण राजधानी का दर्जा देने से कतराते रहे। Gairsain Smart City Project इस सियासी गतिरोध को तोड़ने का एक जरिया बन सकता है। गढ़वाल और कुमाऊं के मध्य स्थित होने के कारण गैरसैंण दोनों मंडलों के बीच सेतु का कार्य करता है।

