उत्तराखंड

Uttarakhand में 2026 से शुरू होगी जनगणना, तीन चरणों में पूरा होगा अभियान

Census will begin in Uttarakhand from 2026, the campaign will be completed in three phases.

देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2026 से जनगणना प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद राज्य स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पूरा अभियान तीन चरणों में संपन्न कराया जाएगा, जिसकी शुरुआत मकान सूचीकरण और भवन गणना से होगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पहला चरण अप्रैल–मई 2026 के बीच पूरा किया जा सकता है।

पहले चरण में घर-घर सर्वे

जनगणना के प्रारंभिक चरण में मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गांवों, कस्बों और शहरों में स्थित मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य भवनों का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक राज्य में करीब 30 हजार गणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में औसतन 800 तक की आबादी को शामिल किया जाएगा, ताकि आंकड़ों का संकलन व्यवस्थित ढंग से हो सके।

इन ब्लॉकों के आधार पर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। हर ब्लॉक के लिए एक गणनाकर्मी नियुक्त होगा, जो निर्धारित प्रारूप में जानकारी जुटाएगा। इसके अलावा पर्यवेक्षण के लिए अलग से सुपरवाइजर भी तैनात किए जाएंगे।

बड़ी संख्या में कर्मियों की तैनाती

राज्य सरकार विभिन्न विभागों से कर्मचारियों को इस कार्य में लगाएगी। अनुमान है कि लगभग 30 हजार गणनाकर्मी और करीब 4 हजार सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे। गणनाकर्मी अपने क्षेत्र का नक्शा तैयार कर घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें मकानों की संख्या, उपयोग की स्थिति और अन्य आधारभूत विवरण शामिल होंगे।

संग्रहित आंकड़े मौके पर ही मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड किए जाएंगे। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और डेटा सीधे केंद्रीय सर्वर पर सुरक्षित रहेगा।

डिजिटल प्रणाली पर रहेगा जोर

इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए बहुभाषी मोबाइल एप तैयार किया गया है, जिससे कर्मचारी सीधे ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकेंगे। प्रक्रिया की निगरानी के लिए सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल राज्य और केंद्र स्तर पर डेटा प्रबंधन का प्रमुख माध्यम होगा।

डिजिटल प्रणाली से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा किया जा सकेगा।

प्रशिक्षण का विस्तृत कार्यक्रम

इतने बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण योजना तैयार की गई है। पहले चरण में वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका निभाएंगे। इसके बाद फील्ड स्तर पर कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी गणनाकर्मी निर्धारित प्रश्नावली और डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग कर सकें। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान व्यवहारिक अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दूसरे चरण में व्यक्तिगत विवरण

मकान सूचीकरण के बाद दूसरे चरण में व्यक्तिगत जनगणना की जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण 2027 की शुरुआत में संपन्न होने की संभावना है।

विकास योजनाओं का आधार बनेगा डेटा

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े राज्य की नीतियों और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बनते हैं। सटीक और अद्यतन डेटा के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता है।

उत्तराखंड में प्रस्तावित यह तीन-चरणीय जनगणना अभियान राज्य की जनसांख्यिकीय तस्वीर को स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाएगा। प्रशासन का दावा है कि तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ तैयारी के साथ इस बार प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी होगी।

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