उत्तराखंड जिला पंचायत अध्यक्ष पद आरक्षण की अंतिम सूची जारी, कई जिलों में महिला उम्मीदवारों को मिलेगा मौका
Final list of reservation for Uttarakhand District Panchayat President post released, women candidates will get chance in many districts
राज्य में पंचायत चुनाव की अगली कड़ी शुरू
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। इस सिलसिले में पंचायती राज विभाग ने 6 अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी है। इसमें एक अगस्त को जारी की गई अनंतिम सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्व में घोषित आरक्षण यथावत रहेगा।
देहरादून समेत पांच जिलों की सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
देहरादून जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष सीट को लेकर काफी समय से चर्चा थी कि यह किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। अंतिम सूची के अनुसार देहरादून, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा और रुद्रप्रयाग जिलों की सीटें सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अर्थ यह है कि इन जिलों में केवल सामान्य श्रेणी की महिलाएं ही अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगी।
एससी और ओबीसी वर्ग को भी मिला प्रतिनिधित्व
आरक्षण की सूची में पिथौरागढ़ जिले की सीट अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित की गई है, जबकि बागेश्वर की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए तय हुई है। उधम सिंह नगर जिले की सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहेगी। वहीं, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली और चंपावत जिलों की सीटें अनारक्षित रखी गई हैं, जिनसे कोई भी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है।
आपत्तियों का हुआ निस्तारण, सूची में नहीं हुआ बदलाव
1 अगस्त को जारी अनंतिम आरक्षण सूची के बाद 4 अगस्त तक आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। इस दौरान पूरे राज्य से 42 आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनका निस्तारण शासन स्तर पर गठित समिति ने 5 अगस्त को कर दिया। इसके बावजूद अंतिम सूची में कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
सबसे ज्यादा आपत्तियां देहरादून से
इन 42 आपत्तियों में से सबसे अधिक 15 आपत्तियां देहरादून से और 9 पौड़ी से आईं। बाकी जिलों से कुछ ही आपत्तियां आईं, जबकि नैनीताल, बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे जिलों से कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं हुई।
महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा
इस बार आरक्षित सीटों में महिलाओं की हिस्सेदारी ज्यादा देखने को मिल रही है। इससे पंचायत राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और सशक्तिकरण को बल मिलेगा। अब देखना होगा कि कौन-कौन चेहरे इन आरक्षित सीटों से नेतृत्व के रूप में सामने आते हैं।

