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Farmers Mahapanchayat Delhi: किसान घाट पर आज बड़ी महापंचायत, MSP से लेकर US Trade Deal तक कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

Farmers' Mahapanchayat in Delhi: A major Mahapanchayat is taking place at Kisan Ghat today; preparations are underway to corner the government on several issues, ranging from MSP to the US trade deal.

Farmers Mahapanchayat Delhi आज देश की राजनीति और कृषि क्षेत्र का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। राजधानी दिल्ली में 21 जुलाई को आयोजित इस विशाल किसान महापंचायत में देशभर के सैकड़ों किसान संगठनों और सामाजिक मंचों के शामिल होने का दावा किया गया है। आयोजन का आह्वान ‘देश बचाओ मोर्चा’ ने किया है, जिसमें किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद की जाएगी।

किसानों का कहना है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौता (US Trade Deal) भारतीय कृषि, डेयरी उद्योग और छोटे किसानों के हितों के खिलाफ हो सकता है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और कृषि ऋण माफी जैसे मुद्दे भी इस Farmers Mahapanchayat Delhi के केंद्र में हैं।

Farmers Mahapanchayat Delhi: क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?

इस Farmers Mahapanchayat Delhi में किसान संगठनों ने कई प्रमुख मांगों को सरकार के सामने रखने का फैसला किया है। सबसे पहली मांग सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फार्मूले के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी लागू करने की है।

दूसरी बड़ी मांग अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते को रोकने की है। किसानों का दावा है कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू हुआ तो विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसके अलावा किसान संगठनों ने कृषि ऋण माफी, डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा, कृषि लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई नीतियां लागू करने की भी मांग उठाई है।

Farmers Mahapanchayat Delhi: US Trade Deal को लेकर क्यों बढ़ा विरोध?

इस बार Farmers Mahapanchayat Delhi का सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक समझौता है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच मिलती है तो इसका सीधा असर देश के छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ेगा।

विशेष रूप से डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों को चिंता है कि विदेशी डेयरी कंपनियों के आने से घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी और दूध उत्पादकों की आय प्रभावित हो सकती है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन किसान संगठन पहले से ही अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं।

Farmers Mahapanchayat Delhi: कई राज्यों से दिल्ली पहुंचे किसान

महापंचायत में शामिल होने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से किसान दिल्ली की ओर रवाना हुए हैं।

कई किसान संगठन पहले ही राजधानी पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य जत्थे विभिन्न सीमाओं से होकर दिल्ली में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि इस महापंचायत में करीब 550 किसान संगठन और सामाजिक मंच भाग ले सकते हैं।

यदि इतनी बड़ी संख्या में किसान राजधानी पहुंचते हैं तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी किसान सभाओं में से एक मानी जा सकती है।

Farmers Mahapanchayat Delhi: हरियाणा में पुलिस की कार्रवाई तेज

महापंचायत से पहले हरियाणा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी सहित कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया या नजरबंद किया गया है।

इसके विरोध में किसानों ने हरियाणा के कई इलाकों में टोल प्लाजा और राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

Farmers Mahapanchayat Delhi: शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई

पंजाब से आने वाले किसान शंभू बॉर्डर के रास्ते दिल्ली पहुंचने की योजना बना रहे हैं। इसे देखते हुए हरियाणा पुलिस ने सीमा पर भारी बैरिकेडिंग कर दी है।

अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

किसान संगठनों ने कहा है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।

Farmers Mahapanchayat Delhi: क्या दोबारा बन सकते हैं आंदोलन जैसे हालात?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान संगठनों और प्रशासन के बीच संवाद सफल नहीं होता, तो कुछ स्थानों पर तनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि अधिकांश किसान नेताओं ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है।

2020-21 के किसान आंदोलन के अनुभव को देखते हुए प्रशासन इस बार पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी कर रही हैं।

MSP और कृषि सुधार फिर बने राष्ट्रीय बहस का मुद्दा

महापंचायत के जरिए एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक किसानों को उनकी उपज का कानूनी रूप से सुनिश्चित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती। इसके साथ ही कृषि सुधार, सिंचाई, फसल बीमा, कृषि लागत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य विषय भी किसानों की मांगों में शामिल हैं।

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