उत्तराखंड की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
26 जनवरी को दिल्ली में कर्तव्य पथ पर उत्तराखंड की झांकी ‘सांस्कृतिक विरासत व साहसिक खेलों’ पर आधारित नजर आई। झांकी में जागर गायन और छपेली नृत्य करते हुए उत्तराखंड के कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया। झांकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान भी आकर्षित किया। इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कुल 15 राज्यों की झांकियां शामिल हुईं, जिसमें उत्तराखंड ने चौथे स्थान पर मार्च पास्ट किया।
झांकी में ऐपण आर्ट और साहसिक खेलों का प्रदर्शन
उत्तराखंड की झांकी के अग्र भाग में ऐपण आर्ट को प्रदर्शित किया गया। इसमें उत्तराखंडी परिधान में महिला को ऐपण बनाते हुए दिखाया गया। झांकी के मध्य और पिछले हिस्से में साहसिक खेलों जैसे रॉक क्लाइंबिंग, पैराग्लाइडिंग, हिल साइकलिंग, ट्रैकिंग, औली में स्कीइंग और ऋषिकेश में जिप-लाइनिंग को दर्शाया गया।
15 राज्यों की झांकियां रहीं परेड का हिस्सा
गणतंत्र दिवस परेड में आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, और दादर नागर हवेली एवं दमन जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां शामिल रहीं।
राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में उत्तराखंड का जलवा
गणतंत्र दिवस की परेड से पहले दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में उत्तराखंड के कलाकारों ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। इससे पहले 2018 में भी उत्तराखंड की झांकी ने तीसरा स्थान हासिल कर पुरस्कार अपने नाम किया था।
उत्तराखंड की झांकी का प्रभाव
उत्तराखंड की झांकी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेलों के संयोजन के माध्यम से राज्य की परंपराओं और पर्यटन की झलक पेश की। यह झांकी राज्य के साहस, कला और संस्कृति का प्रतीक बनी।

