उत्तराखंड

Republic Day 2026: भारतीय संविधान के इतिहास से जुड़ा देहरादून

Dehradun is connected to the history of the Indian Constitution

देहरादून: देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के साथ भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। आज जब पूरा देश संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव मना रहा है, तब बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान की पहली मुद्रित प्रतियां उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तैयार की गई थीं। यह तथ्य देहरादून को भारत के संवैधानिक इतिहास में एक विशेष स्थान प्रदान करता है।

स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माण की प्रक्रिया एक ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण कार्य था। संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन की लंबी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद इस दस्तावेज को अंतिम रूप दिया। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार यह संविधान आज भी दुनिया का सबसे विस्तृत लिखित संविधान माना जाता है।

हाथ से लिखा गया संविधान, कला और अनुशासन का प्रतीक

भारतीय संविधान की एक अनोखी विशेषता यह है कि इसका मूल स्वरूप हाथ से लिखा गया था। प्रसिद्ध कैलिग्राफर प्रेम नारायण रायजादा ने इसे आकर्षक इटैलिक शैली में लिखा, जबकि प्रत्येक पृष्ठ को पारंपरिक भारतीय कलाकृतियों से सजाया गया। इस कारण संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भी उत्कृष्ट उदाहरण बन गया।

देहरादून को क्यों मिली छपाई की जिम्मेदारी?

जब संविधान का हस्तलिखित स्वरूप तैयार हुआ, तब उसकी छपाई के लिए अत्यंत उन्नत तकनीक और पूर्ण गोपनीयता की आवश्यकता थी। इतिहासकारों के अनुसार, उस समय देश में सर्वश्रेष्ठ प्रिंटिंग सुविधाएं देहरादून स्थित सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में उपलब्ध थीं। इसी वजह से संविधान की पहली प्रतियां छापने की जिम्मेदारी सर्वे ऑफ इंडिया को सौंपी गई।

यह कार्य सर्वे ऑफ इंडिया के लिए भी गर्व का विषय था। इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी के साथ देहरादून का नाम भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दस्तावेज से स्थायी रूप से जुड़ गया।

आधुनिक तकनीक से छपीं संविधान की प्रतियां

संविधान की छपाई के लिए उस समय की अत्याधुनिक फोटो लिथोग्राफिक तकनीक का उपयोग किया गया। इस तकनीक से हस्तलिखित मूल प्रति की हूबहू प्रतिकृति तैयार की गई, जिससे अक्षरों की सुंदरता और शुद्धता पूरी तरह सुरक्षित रही। देहरादून के हाथीबड़कला क्षेत्र स्थित सर्वे ऑफ इंडिया प्रेस में संविधान की लगभग एक हजार प्रतियां छापी गई थीं। पूरी प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और सुरक्षा के साथ संपन्न की गई।

आज भी सुरक्षित है ऐतिहासिक धरोहर

भारतीय संविधान की पहली प्रकाशित प्रति आज भी सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून में संरक्षित है। वहीं, संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है। सर्वे ऑफ इंडिया परिसर में वे प्रिंटिंग मशीनें भी आज तक मौजूद हैं, जिनका उपयोग संविधान की छपाई में किया गया था।

देहरादून और भारतीय लोकतंत्र की साझा विरासत

गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह तथ्य गर्व का विषय है कि भारतीय लोकतंत्र की नींव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय देहरादून में लिखा गया। यह शहर न केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के संवैधानिक इतिहास में भी इसकी विशिष्ट पहचान है। देहरादून की यह भूमिका हमें याद दिलाती है कि राष्ट्र निर्माण में कई ऐसे स्थान रहे हैं, जिन्होंने शांत रहकर इतिहास रच दिया।

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