हरिद्वार में श्रद्धा और सम्मान का संगम, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने किया स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की मूर्ति का अनावरण
A confluence of reverence and respect in Haridwar, Rajnath Singh and CM Yogi unveiled the statue of Swami Satyamitranand Giri.
हरिद्वार (उत्तराखंड): धर्मनगरी हरिद्वार गुरुवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक अवसर की साक्षी बनी, जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरी हरिद्वार स्थित सप्तऋषि क्षेत्र में आयोजित भव्य समारोह में शिरकत की। यह आयोजन भारत माता मंदिर के संस्थापक और पद्मविभूषित ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की स्मृति में उनकी समाधि पर मूर्ति स्थापना के अवसर पर आयोजित किया गया।
सुबह जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट से सभी अतिथि निर्धारित मार्ग से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, जहां धार्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि की समाधि पर मूर्ति स्थापना कार्यक्रम तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें देशभर से संत, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां भाग लेंगी। गुरुवार को मुख्य कार्यक्रम के तहत समाधि मंदिर में उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच उपस्थित अतिथियों ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को श्रद्धांजलि अर्पित की।
देश की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि के जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि के विचारों को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि केवल एक संत ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना के प्रखर संवाहक थे। भारत माता मंदिर की स्थापना के माध्यम से उन्होंने देशभक्ति को आध्यात्मिक स्वरूप दिया और समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया।
श्रद्धा और संस्कृति का संदेश
मूर्ति स्थापना समारोह के बाद कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों के संबोधन का क्रम शुरू हुआ, जिसमें संत समाज और जनप्रतिनिधियों ने स्वामी जी के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और अनुशासित व्यवस्था ने पूरे कार्यक्रम को भव्य रूप प्रदान किया।
धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के इस संगम ने हरिद्वार को एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला केंद्र बना दिया है।

