नई दिल्ली – गर्मियों के मौसम में आम की मिठास हर किसी को लुभाती है, लेकिन बाजार में उपलब्ध हर आम सुरक्षित नहीं होता। आजकल तेजी से मुनाफा कमाने की होड़ में कई व्यापारी आम को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो न सिर्फ स्वाद में फर्क लाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
क्या होते हैं नकली या आर्टिफिशियल पके आम?
जब आम को प्राकृतिक तरीके से पकाने की बजाय रसायनों की मदद से जल्दी तैयार किया जाता है, तो उसे नकली या आर्टिफिशियल पका हुआ आम कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल बाजार में सैकड़ों किलो आम कैल्शियम कार्बाइड, एथेफोन और एथिलीन जैसे रसायनों की मदद से पकाए जाते हैं।
कैल्शियम कार्बाइड से सबसे ज्यादा खतरा
सबसे आम केमिकल कैल्शियम कार्बाइड होता है, जिसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे जहरीले तत्व मौजूद होते हैं। यह रसायन सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, और लंबे समय में कैंसर तक की वजह बन सकता है। वहीं, एथेफोन और एथिलीन गैस जैसे अन्य रसायन भी लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कैसे करें नकली आम की पहचान?
- छिलके का रंग: आर्टिफिशियल आमों का रंग असामान्य रूप से एक जैसा और ज्यादा पीला या चमकदार हो सकता है।
- गंध: नेचुरल आमों में मीठी और ताजगी भरी खुशबू होती है, जबकि नकली आमों से रासायनिक गंध आ सकती है।
- वजन और स्पर्श: नकली आम अक्सर जरूरत से ज्यादा नरम और गूदेदार लगते हैं।
- बाहरी दाग: रसायनों के इंजेक्शन से आम की सतह पर धब्बे या खरोंच हो सकती हैं।
- स्वाद: यदि आम का स्वाद फीका या कड़वा है, तो वह आर्टिफिशियल तरीके से पकाया गया हो सकता है।
- पानी टेस्ट: नेचुरल आम पानी में डूबते हैं, जबकि नकली आम तैर सकते हैं।
- बेकिंग सोडा टेस्ट: बेकिंग सोडा मिले पानी में आम डालने पर रंग बदलता है तो रसायनों की संभावना होती है।
सावधानी ही सुरक्षा है
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी लोगों को सलाह दी है कि आम खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, रंग, गंध और स्पर्श की सावधानी से जांच करें। जहां तक संभव हो, लोकल और भरोसेमंद विक्रेताओं से ही फल खरीदें।
स्वाद और स्वास्थ्य के इस मौसम में एक छोटी सी सावधानी आपको बड़े खतरे से बचा सकती है। क्या आपने आज अपने आम को परखा?

