उत्तराखंड

देहरादून में राष्ट्रीय लोक अदालत: 17 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण, 21 करोड़ से ज्यादा का सेटलमेंट

National Lok Adalat in Dehradun: Over 17,000 cases settled, settlement worth more than 21 crore rupees.

देहरादून। राजधानी देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता का मजबूत उदाहरण पेश किया। जिला मुख्यालय स्थित कोर्ट परिसर में लगी लोक अदालत में महज एक दिन के भीतर 17,177 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में बड़ी संख्या ऐसे वादों की थी, जो विभिन्न न्यायालयों में लंबे समय से लंबित थे। लोक अदालत के माध्यम से कुल 21 करोड़ 75 लाख 49 हजार 988 रुपये की धनराशि पर आपसी सहमति से समझौता हुआ।

हर तीन माह में होता है लोक अदालत का आयोजन

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों के तहत देशभर में प्रत्येक तीन माह में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में 13 दिसंबर को देहरादून जिले में वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। यह लोक अदालत सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जिला मुख्यालय कोर्ट परिसर के साथ-साथ ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी और चकराता स्थित तहसील न्यायालयों में भी संपन्न हुई।

विभिन्न प्रकृति के मामलों पर हुई सुनवाई

लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा, सिविल विवाद, पारिवारिक मामले, चेक बाउंस, शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामले और अन्य विवादों की सुनवाई की गई। देहरादून जिला मुख्यालय कोर्ट परिसर में शमनीय आपराधिक मामलों के 511, बैंक से जुड़े 507, धन वसूली के 26, मोटर दुर्घटना क्लेम के 57, पारिवारिक विवाद के 59, लेबर बोर्ड के 3, मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत 8,950 और अन्य सिविल प्रकृति के 48 मामलों का निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर मुख्यालय स्तर पर हजारों मामलों का समाधान आपसी समझौते से संभव हुआ।

तहसील न्यायालयों में भी दिखा सकारात्मक परिणाम

जिला मुख्यालय के अलावा तहसील न्यायालयों में भी लोक अदालत का व्यापक असर देखने को मिला। विकासनगर में 1,242 मामलों का निस्तारण कर 1.21 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर समझौता हुआ। ऋषिकेश में 1,377 मामलों में लगभग 2.73 करोड़ रुपये का सेटलमेंट किया गया। डोईवाला तहसील कोर्ट में 241 मामलों का निस्तारण कर करीब 2.43 करोड़ रुपये की धनराशि पर सहमति बनी। मसूरी में 52 मामलों में 9.15 लाख रुपये और चकराता में 13 मामलों में 11.16 लाख रुपये का समझौता हुआ।

पेंडेंसी घटाने में अहम भूमिका

इस राष्ट्रीय लोक अदालत को इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद पहली बार देहरादून जिला न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या एक लाख से नीचे आ गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि लोक अदालतें त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण न्याय प्रदान कर न्याय प्रणाली की गरिमा को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से मामलों का समाधान न केवल समय और धन की बचत करता है, बल्कि समाज में विश्वास भी बढ़ाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button