Devprayag Assembly Election: देवप्रयाग में पंडा-पुरोहित समाज ने धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ के नाम पर लगाई मुहर, लोकल प्रत्याशी की मांग तेज
Devprayag Assembly Election: The community of priests in Devprayag has endorsed Dheeraj Panchbhaiya ‘Monu’; demand for a local candidate intensifies.
Devprayag Assembly Election: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच पंडा-पुरोहित समाज की ओर से स्थानीय प्रत्याशी को लेकर आवाज उठाई गई है। समाज से जुड़े लोगों ने धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ के नाम पर अपना समर्थन जताते हुए कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रत्याशी स्थानीय होना चाहिए।
पुरोहित समाज और क्षेत्र के लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि देवप्रयाग क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों, समस्याओं और लोगों की जरूरतों को समझने वाला व्यक्ति ही क्षेत्र की आवाज विधानसभा तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकता है।
स्थानीय प्रत्याशी को लेकर बढ़ी मांग
Devprayag Assembly Election में स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा अब चर्चा के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। पंडा-पुरोहित समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र के लोग अपनी समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को सामने रखते रहे हैं। ऐसे में इस बार उनकी प्राथमिकता स्थानीय चेहरे की होगी।
समाज के लोगों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चुनाव में बाहरी प्रत्याशी के बजाय देवप्रयाग क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि स्थानीय व्यक्ति क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, धार्मिक महत्व, रोजगार, पर्यटन और आम जनता की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ के नाम पर समर्थन
इसी क्रम में पंडा-पुरोहित समाज की ओर से धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ के नाम पर समर्थन जताया गया है। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि धीरज पंचभैय्या लंबे समय से क्षेत्र और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
धीरज पंचभैय्या का नाम बद्रीनाथ धाम से जुड़े पांडा-पुरोहित समाज में भी सक्रिय रूप से सामने आता रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि बद्रीनाथ धाम के पांडा-पुरोहित देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े हैं और उनका व्यापक सामाजिक नेटवर्क है। इसी आधार पर समर्थक उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली स्थानीय चेहरा मान रहे हैं।

बद्रीनाथ धाम से जुड़े पांडा-पुरोहित समाज का भी जिक्र
देवप्रयाग की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक समीकरणों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। बद्रीनाथ धाम के पांडा-पुरोहित देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और परिवारों से लंबे समय से जुड़े रहते हैं।
समर्थकों का दावा है कि देश के 28 राज्यों में बद्रीनाथ धाम से जुड़े पांडा-पुरोहित परिवारों का व्यापक संपर्क है। ऐसे में पंडा-पुरोहित समाज का समर्थन किसी भी राजनीतिक दावेदार के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
हालांकि, यह समर्थन फिलहाल स्थानीय स्तर पर सामने आया है और अंतिम राजनीतिक तस्वीर संबंधित दलों द्वारा प्रत्याशी चयन तथा आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरी बार मंदिर समिति में सदस्य बनने का दावा
धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ के समर्थकों ने यह भी उल्लेख किया कि वह लगातार दूसरी बार बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सदस्य के रूप में अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं। उनके समर्थक इसे धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता से जोड़कर देखते हैं।
उनका कहना है कि मंदिर समिति से जुड़ाव के दौरान उन्होंने धार्मिक व्यवस्थाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को करीब से समझने का अवसर पाया है। यही कारण है कि अब उन्हें Devprayag Assembly Election के लिए संभावित स्थानीय दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी से दावेदारी की बात कही
धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ से बातचीत के बाद उन्होंने स्वयं भी विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी की बात स्वीकार की। उनका कहना है कि वह भारतीय जनता पार्टी से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
हालांकि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखते हुए कहा कि अंतिम निर्णय संगठन और नेतृत्व का होगा। पार्टी नेतृत्व जिस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला करेगा, वह निर्णय उन्हें स्वीकार होगा।
यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे एक ओर उनकी व्यक्तिगत दावेदारी स्पष्ट होती है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के निर्णय को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया है।
स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत
देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय प्रत्याशी को लेकर उठ रही मांग आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। क्षेत्र में संभावित दावेदारों को लेकर अभी से चर्चाएं शुरू हो गई हैं और अलग-अलग सामाजिक समूह अपने पसंदीदा चेहरों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
Devprayag Assembly Election के लिहाज से स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल पंडा-पुरोहित समाज की ओर से स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देने की बात ने राजनीतिक चर्चा को जरूर तेज कर दिया है।
जनता की पसंद और पार्टी का फैसला होगा निर्णायक
चुनाव में किसी भी प्रत्याशी की दावेदारी को अंतिम रूप देने में पार्टी संगठन के साथ-साथ स्थानीय जनता की राय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ को मिले समर्थन के दावों के बीच अब यह देखना होगा कि भारतीय जनता पार्टी देवप्रयाग सीट को लेकर क्या रणनीति अपनाती है।
स्थानीय लोगों और पुरोहित समाज की ओर से यदि स्थानीय प्रत्याशी की मांग लगातार मजबूत होती है, तो राजनीतिक दलों के लिए भी प्रत्याशी चयन के दौरान इस समीकरण को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
फिलहाल धीरज पंचभैय्या ‘मोनू’ ने अपनी दावेदारी सामने रख दी है और नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही है। अब Devprayag Assembly Election की आगामी राजनीतिक तस्वीर पार्टी की रणनीति, स्थानीय समीकरणों और जनता के रुख पर निर्भर करेगी।



