अलकनंदा की लहरों ने कोटेश्वर गुफा को किया जलमग्न, रुद्रप्रयाग में समय से पहले दिखा अद्भुत और चिंताजनक दृश्य
Alaknanda's waves submerged Koteshwar cave, a wonderful and worrying scene was seen before time in Rudraprayag
रुद्रप्रयाग, 28 जून 2025: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते अलकनंदा नदी उफान पर है। इसका नतीजा यह हुआ कि जिले का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कोटेश्वर गुफा पूरी तरह से पानी में समा गया। आमतौर पर यह दृश्य सावन माह में देखने को मिलता है, लेकिन इस बार मानसून की असामान्य तीव्रता ने जून के अंतिम सप्ताह में ही ऐसा नजारा दिखा दिया।
तीव्र बारिश के कारण बदला अलकनंदा का रुख
कोटेश्वर गुफा, जो जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर और नदी से लगभग 30 मीटर ऊपर स्थित है, आमतौर पर सुरक्षित रहती है। मगर बीती रात हुई लगातार मूसलधार बारिश के चलते नदी का जलस्तर इतनी ऊंचाई तक पहुंच गया कि उसकी लहरों ने गुफा को छू लिया। यह एक तरफ आस्था से जुड़ा दृश्य था, लेकिन दूसरी तरफ प्राकृतिक चेतावनी भी।
श्रद्धा और संकट का दुर्लभ संयोग
स्थानीय निवासी रवि सिंधवाल ने बताया कि गुफा तक अलकनंदा की लहरों का पहुंचना आमतौर पर सावन में एक बार होता है, जब लोग इसे भगवान शिव के जलाभिषेक के रूप में देखते हैं। लेकिन इस बार यह घटना जुलाई से पहले ही घट गई, जो चिंताजनक है। श्रद्धालुओं के लिए यह एक आध्यात्मिक क्षण जरूर था, मगर इसके पीछे छिपा प्राकृतिक खतरा भी उतना ही बड़ा है।
बदरीनाथ घाटी में लगातार वर्षा बनी वजह
इस घटना के पीछे बदरीनाथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश को मुख्य कारण माना जा रहा है। पहाड़ों पर मलबा गिरने, सड़कें बाधित होने और भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। यह स्थिति आम लोगों के जीवन और पर्यटकों की आवाजाही दोनों को प्रभावित कर रही है।
जलवायु परिवर्तन को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र बद्री का कहना है कि यह घटना जलवायु असंतुलन और मानवीय दखल का परिणाम है। उन्होंने बताया कि नदियों के किनारे अंधाधुंध निर्माण और मलबा फेंकने से प्राकृतिक बहाव प्रभावित हो रहा है। इससे नदियों का मार्ग बदल रहा है, जो भविष्य में बड़े खतरों को जन्म दे सकता है।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नदियों के किनारे जाने से परहेज करने और संभावित भू-स्खलन वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
गुफा का जलमग्न होना सिर्फ आस्था नहीं, चेतावनी भी
कोटेश्वर गुफा तक अलकनंदा का पहुंचना अब केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन में आई गड़बड़ी का संकेत है। यह समय है कि प्रशासन, नागरिक और विशेषज्ञ मिलकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में गंभीरता से कदम उठाएं, ताकि ऐसे दृश्य भविष्य में केवल आस्था के प्रतीक रहें, संकट के नहीं।

